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ग्रहीय तंत्र

प्रॉक्सिमा सेंटॉरी ग्रह तंत्र

प्रॉक्सिमा सेंटॉरी, अल्फा सेंटॉरी A और B से बहुत दूर है, फिर भी तीनों तारे गुरुत्वाकर्षण से बंधे हैं। प्रॉक्सिमा के चारों ओर b और d नाम के दो ग्रह पुष्ट हैं, जबकि उससे दूर c अभी संभावित ग्रह है। जानें कि तारों की रोशनी में दिखने वाली बहुत छोटी गति से ग्रह कैसे खोजे जाते हैं और रहने योग्य क्षेत्र में होना जीवन की खोज क्यों नहीं है।

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प्रॉक्सिमा सेंटॉरी के चारों ओर कौन-से ग्रह हैं?

प्रॉक्सिमा सेंटॉरी के चारों ओर अब तक b और d नाम के दो ग्रह पुष्ट हुए हैं। c को भी ग्रह होने की संभावना के रूप में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन प्रमाण अभी पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए वह संभावित ग्रह बना हुआ है। b और d के लिए तारे की समान आवर्ती गति कई अवलोकनों में दोहराई गई, जबकि c का संकेत दोबारा स्पष्ट रूप से नहीं मिला।

अल्फा सेंटॉरी A और B दो तारे हैं जो एक-दूसरे के पास रहकर परिक्रमा करते हैं। प्रॉक्सिमा इस जोड़ी से लगभग 13,000 AU दूर बहुत लंबी अवधि की कक्षा में घूमता है। सूर्य और प्रॉक्सिमा के बीच की दूरी इतनी अधिक है कि प्रकाश को भी चार वर्ष से ज्यादा समय लगता है, फिर भी खगोलीय पैमाने पर यह हमारा सबसे नजदीकी पड़ोसी तारा है। इसलिए इसकी बहुत छोटी गति और चमक में बदलाव को कई दूसरे बाह्यग्रह तंत्रों की तुलना में अधिक विस्तार से बार-बार देखा जा सकता है।

  • लगभग 4.24 प्रकाश-वर्ष सूर्य से प्रॉक्सिमा सेंटॉरी की दूरी
  • लगभग 13,000 AU पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी का लगभग 13,000 गुना
  • 2 पुष्ट ग्रह प्रॉक्सिमा b और प्रॉक्सिमा d
  • 1 संभावित ग्रह प्रॉक्सिमा c का संकेत, जिसकी ग्रह के रूप में पुष्टि नहीं हुई है

अल्फा सेंटॉरी के तीनों तारे आपस में कैसे जुड़े हैं?

अल्फा सेंटॉरी A और B सूर्य जैसे दो तारे हैं जो लगभग 80 वर्ष में एक बार एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं। प्रॉक्सिमा बहुत कम द्रव्यमान और चमक वाला लाल बौना तारा है। वह A–B की जोड़ी से बहुत दूर रहकर दोनों के बाहर परिक्रमा करता है। तीनों तारे बराबर दूरी पर एक पंक्ति में नहीं घूमते। पास की A–B जोड़ी और बहुत दूर प्रॉक्सिमा मिलकर एक तारकीय तंत्र बनाते हैं।

प्रॉक्सिमा के ग्रह इसी छोटे तारे की सीधी परिक्रमा करते हैं। b की कक्षीय दूरी पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी का लगभग 5% है और d उससे भी अंदर है। ये कक्षाएँ प्रॉक्सिमा और A–B के बीच की दूरी से लाखों का बड़ा हिस्सा छोटी हैं। बहुत लंबे समय में A और B भी प्रॉक्सिमा और उसके ग्रहों की गति को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन b और d को कुछ दिनों में एक चक्कर पूरा कराते समय सबसे अधिक प्रभाव प्रॉक्सिमा के गुरुत्व का होता है।

b और d की पुष्टि, c से किस तरह अलग है?

प्रॉक्सिमा b ऐसे संकेत से मिला जिसमें तारा लगभग हर 11.2 दिन में पृथ्वी की ओर और फिर उससे दूर थोड़ा-सा चलता दिखाई दिया। कई उपकरणों और विश्लेषणों में वही अवधि दोहराई गई और अब b पुष्ट ग्रह के रूप में दर्ज है। अवलोकनों से मिलने वाला सबसे छोटा संभव द्रव्यमान पृथ्वी का लगभग 1.07 गुना है। b को तारे के सामने से गुजरते नहीं देखा गया है, इसलिए उसका आकार और वास्तविक द्रव्यमान अभी सीधे नहीं मापा गया।

प्रॉक्सिमा d के कारण तारे की गति में बना संकेत लगभग हर 5.12 दिन में दोहराता है। यह बेहद छोटा डगमगाव है: एक दिशा में तारे की गति अधिकतम लगभग 39 सेंटीमीटर प्रति सेकंड बदलती है। 2022 में ESPRESSO के अवलोकनों ने इसे संभावित ग्रह के रूप में पेश किया और 2025 में NIRPS नाम के दूसरे उपकरण ने भी वही संकेत पाया। अवलोकनों से मिलने वाला सबसे छोटा संभव द्रव्यमान पृथ्वी का लगभग 0.26 गुना है।

प्रॉक्सिमा c को लगभग हर 5.2 वर्ष में दोहराने वाले बदलाव के कारण संभावित ग्रह माना गया था। लेकिन 2025 के NIRPS विश्लेषण में पहले बताया गया संकेत साफ तौर पर दोबारा नहीं मिला। NASA Exoplanet Archive भी c को पुष्ट ग्रह के बजाय संभावित ग्रह मानता है। इसलिए इस तंत्र को तीन पुष्ट ग्रहों वाला नहीं बताया जाना चाहिए।

इस समय पुष्ट ग्रह b और d हैं। c अभी संभावित ग्रह है और उसके लिए और अवलोकन चाहिए।

दिखाई न देने वाले ग्रहों की खोज कैसे हुई?

प्रॉक्सिमा b और d की खोज ग्रहों की अपनी तस्वीरों से नहीं हुई। ग्रह और तारा एक-दूसरे को खींचते हैं, इसलिए ग्रह के साथ तारा भी बहुत थोड़ा डगमगाता है। तारा जब पृथ्वी की ओर आता है और फिर उससे दूर जाता है, तो उसके प्रकाश के रंग में बहुत छोटा अंतर पैदा होता है। इस बदलाव को बार-बार मापकर अदृश्य ग्रह खोजने की विधि को रेडियल-वेलोसिटी विधि कहते हैं।

मापी गई गति में केवल ग्रह का संकेत नहीं होता। प्रॉक्सिमा की सतह के धब्बे, फ्लेयर, तारे का घूमना और उपकरण में बहुत छोटे बदलाव भी वैसा डगमगाव बना सकते हैं। शोधकर्ता जाँचते हैं कि क्या अलग-अलग तरंगदैर्घ्य में वही अवधि दिखती है, क्या वह तारे की गतिविधि के संकेतकों के साथ बदलती है और क्या दूसरा उपकरण भी उसे दोहरा सकता है।

सिर्फ रेडियल-वेलोसिटी से यह जानना कठिन है कि ग्रह की कक्षा हमारी दृष्टि रेखा से कितनी झुकी है। इसलिए निकाला गया मान वास्तविक द्रव्यमान नहीं, बल्कि सभी संभव मानों में सबसे छोटा “न्यूनतम द्रव्यमान” होता है। b और d को प्रॉक्सिमा के सामने से गुजरते भी नहीं देखा गया है, इसलिए उनका आकार, घनत्व और सतह बनाने वाला पदार्थ सीधे ज्ञात नहीं है।

इस पृष्ठ पर ग्रहों के चित्र वास्तविक तस्वीरें नहीं हैं। ये पुष्ट परिक्रमा अवधि और न्यूनतम द्रव्यमान पर आधारित दृश्यांकन हैं; सतह के रंग, महासागर और बादल अवलोकनों से नहीं मिले हैं।

  1. तारे के प्रकाश को कई बार मापें कई दिनों और वर्षों तक प्रॉक्सिमा के प्रकाश को रंगों में बाँटकर दर्ज करें।
  2. तारे की गति निकालें प्रकाश में बहुत छोटे बदलाव को पृथ्वी की ओर या उससे दूर तारे की गति में बदलें।
  3. तारे के अपने बदलाव अलग करें तुलना करें कि धब्बे, फ्लेयर और घूर्णन से बने बदलाव उसी समय तो नहीं दिख रहे।
  4. दूसरे उपकरण से फिर जाँचें प्रकाश का भाग और उपकरण बदलने पर भी वही संकेत दोहरता है या नहीं, यह देखें।
  5. प्रमाण के अनुसार वर्गीकरण करें पर्याप्त प्रमाण मिलने पर पुष्ट ग्रह दर्ज करें, नहीं तो उसे संभावित ग्रह रहने दें।

रहने योग्य क्षेत्र से हमें क्या पता चलता है?

सिर्फ तारे से मिलने वाली ऊर्जा को देखें तो प्रॉक्सिमा b रहने योग्य क्षेत्र में है। इसका अर्थ है कि यदि वातावरण सही मात्रा में गर्मी रोक सके, तो उसकी दूरी सतह पर तरल पानी रहने लायक हो सकती है। इसका अर्थ यह नहीं कि पानी, वातावरण, चुंबकीय क्षेत्र या जीवन देखा गया है। b तारे के सामने से नहीं गुजरता, इसलिए अभी यह भी नहीं मापा गया कि उसके वातावरण में कौन-सी गैसें हैं या वातावरण है भी या नहीं।

प्रॉक्सिमा सूर्य से छोटा और ठंडा है, लेकिन वह अक्सर ऐसे विस्फोट करता है जिनसे तेज पराबैंगनी प्रकाश और एक्स-रे निकलते हैं। यह विकिरण पास के ग्रह का वातावरण हटा सकता है या उसकी रासायनिक बनावट बदल सकता है। यदि ग्रह के पास काफी घना वातावरण या चुंबकीय क्षेत्र हो, तो प्रभाव अलग हो सकता है। मौजूदा आँकड़े नहीं बताते कि b की सतह का वातावरण कैसा है।

पास का तारा ग्रहों के अध्ययन में कैसे मदद करता है?

दूसरे तारों की तुलना में 4.24 प्रकाश-वर्ष पास है, लेकिन आज के अंतरिक्ष यान इसे कम समय में तय नहीं कर सकते। खगोलीय अवलोकन के लिए यह दूरी बड़ा लाभ है। प्रॉक्सिमा अपेक्षाकृत चमकीला दिखाई देता है और आकाश में उसकी स्थिति का बदलाव भी अधिक आसानी से मापा जा सकता है। इसलिए छोटे गति संकेतों और लंबी अवधि की कक्षाओं को लगातार जाँचा जा सकता है।

आगे भी कई विधियों से अवलोकन जारी रखने होंगे। लंबे समय तक तारे की गति मापने से पता चलेगा कि c का संभावित संकेत फिर दोहरता है या नहीं। आकाश में तारे की स्थिति कितनी बदलती है, इसे बहुत सटीकता से मापने पर ग्रहों की कक्षाओं के झुकाव और वास्तविक द्रव्यमान की सीमा छोटी की जा सकती है। भविष्य में यदि अधिकतर तारकीय प्रकाश को रोककर ग्रह से आए प्रकाश का अलग विश्लेषण हो सके, तो उसके वातावरण की पहली जानकारी मिल सकती है। तब तक b और d के पुष्ट मानों को c की संभावित स्थिति से साफ अलग बताना होगा।

स्रोत

मापे गए मान

भौतिक विशेषताएँ

व्यास
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औसत त्रिज्या
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द्रव्यमान
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औसत घनत्व
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सतही गुरुत्व
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पलायन वेग
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नाक्षत्र घूर्णन काल
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परिक्रमण काल
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औसत तापमान
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सतही दाब
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कक्षा का अर्ध-दीर्घ अक्ष
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कक्षीय विकेन्द्रता
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अक्षीय झुकाव
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संबंध

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