प्रॉक्सिमा सेंटॉरी d की ग्रह के रूप में पुष्टि कैसे हुई?
प्रॉक्सिमा सेंटॉरी d की खोज किसी तस्वीर में या उसे तारकीय प्रकाश रोकते देखकर नहीं हुई। ग्रह का गुरुत्व तारे को बहुत थोड़ा आगे-पीछे खींचता है और इससे तारकीय प्रकाश में जो बदलाव आता है, उसी से ग्रह मिला। 2022 में प्रकाशित दृश्य-प्रकाश अवलोकनों में लगभग हर 5.12 दिन पर दोहराता बदलाव दिखा। 2025 में निकट-अवरक्त प्रकाश देखने वाले दूसरे उपकरण में भी यही अवधि मिली। अलग समय और अलग उपकरण में समान नतीजा मिलने के बाद प्रॉक्सिमा d को पुष्ट ग्रह माना गया।
39 सेंटीमीटर प्रति सेकंड प्रॉक्सिमा d की कक्षीय गति नहीं है। इसका अर्थ है कि ग्रह के गुरुत्व के कारण प्रॉक्सिमा सेंटॉरी जब पृथ्वी की ओर आता और दूर जाता है, तो तारे की एक दिशा में गति अधिकतम लगभग 39 सेंटीमीटर प्रति सेकंड बदलती है। पैदल चलते व्यक्ति से बहुत धीमी इस गति को तारकीय प्रकाश के बेहद छोटे बदलाव से मापा गया।
- लगभग 5.12 दिन प्रॉक्सिमा d को तारे की एक परिक्रमा में लगने वाला समय
- लगभग 39 सेमी/सेकंड ग्रह में नहीं, तारे में मापा गया अधिकतम गति बदलाव
- पृथ्वी का लगभग 0.26 गुना अवलोकनों से तय हो सकने वाला सबसे छोटा द्रव्यमान
- लगभग 43.1 लाख किमी तारे और ग्रह के बीच की औसत दूरी
पहली बार मिलने पर इसे केवल उम्मीदवार क्यों माना गया?
चिली में Very Large Telescope पर लगे ESPRESSO उपकरण ने 2019 से 2021 के बीच 99 रातों में प्रॉक्सिमा सेंटॉरी के प्रकाश के 117 माप लिए। शुरुआती उद्देश्यों में से एक पहले से ज्ञात प्रॉक्सिमा b के संकेत को अधिक सटीक मापना था। आंकड़ों के विश्लेषण में b की लगभग 11.2 दिन की अवधि से अलग, लगभग हर 5.12 दिन में दोहराने वाला बदलाव मिला।
यदि यह बदलाव ग्रह से आया था, तो उसका न्यूनतम द्रव्यमान पृथ्वी का लगभग 0.26 गुना और तारे से दूरी करीब 43.1 लाख किलोमीटर होती। लेकिन संकेत बहुत छोटा था और मुख्यतः एक उपकरण के आंकड़ों पर निर्भर था। इसलिए 2022 के शोधपत्र ने तुरंत पुष्ट ग्रह नहीं, बल्कि “ग्रह उम्मीदवार” घोषित किया। संकेत से ग्रह के मान निकाले जा सकें, तब भी उसके असली कारण की अलग से जांच जरूरी होती है।
तारे की गतिविधि और ग्रह के संकेत में अंतर कैसे पहचाना जाता है?
प्रॉक्सिमा सेंटॉरी एक लाल बौना तारा है जिसकी सतह के काले धब्बे और चमकीले क्षेत्र बदलते रहते हैं और जिसमें अक्सर फ्लेयर होते हैं। तारा घूमता है, तो ये क्षेत्र हमारी ओर अलग स्थान पर दिखते हैं और उसके प्रकाश को थोड़ा बदलते हैं। इससे ऐसा लग सकता है कि पूरा तारा सचमुच हिला है। केवल कुछ दस सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति मापते समय उपकरण के छोटे बदलाव और पृथ्वी के वायुमंडल से तारकीय प्रकाश पर पड़ा असर भी देखना पड़ता है।
2022 के शोधकर्ताओं ने तारे की चमक और चुंबकीय गतिविधि की जांच की तथा लगभग 90 दिन के घूर्णन और लंबे समय के बदलावों को गणना में शामिल किया। इसके बाद भी 5.12 दिन का संकेत बचा रहा। ग्रह की संभावना बढ़ी, लेकिन एक ही गणना पर निर्भर न रहने के लिए दूसरे उपकरण और दूसरी तरह की रोशनी में भी वही अवधि खोजना जरूरी था।
दूसरे उपकरण से किए गए अवलोकन में कौन-सा संकेत मिला?
NIRPS दल ने 159 रातों में लिए गए 420 निकट-अवरक्त मापों का विश्लेषण किया और उनकी तुलना पुराने दृश्य-प्रकाश आंकड़ों से की। तारे के काले और चमकीले क्षेत्र अलग प्रकार की रोशनी को अलग मात्रा में प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन ग्रह पूरे तारे को हिलाए, तो दृश्य और निकट-अवरक्त दोनों में समान अवधि वाला बदलाव दिखना चाहिए।
2025 में प्रकाशित विश्लेषण में निकट-अवरक्त आंकड़ों में भी लगभग 5.12 दिन का संकेत मिला। पहले अध्ययन से समय, उपकरण और रोशनी का प्रकार अलग होने पर भी वही अवधि आई। NASA की मौजूदा बाह्यग्रह सूची प्रॉक्सिमा d को पुष्ट ग्रह बताती है। “पुष्ट” का अर्थ यह नहीं कि छोटा संकेत बड़ा हो गया; इसका अर्थ है कि दूसरे संभावित कारणों की तुलना में ग्रह सभी अवलोकनों को बेहतर समझाता है।
प्रॉक्सिमा d की पुष्टि केवल 39 सेमी/सेकंड के एक आंकड़े से नहीं हुई। वही 5.12 दिन की अवधि अलग समय, अलग उपकरण और अलग तरंगदैर्घ्य में दोहराई।
प्रॉक्सिमा d के बारे में किन बातों की पुष्टि हुई है?
केवल यह मापने से कि तारा पृथ्वी की ओर या उससे दूर कितनी तेजी से जाता है, ग्रह की कक्षा का हमारी दृष्टि रेखा से झुकाव नहीं पता चलता। इसलिए पृथ्वी के लगभग 0.26 गुने का मान सबसे छोटा संभव द्रव्यमान है। हमारे दृष्टिकोण से कक्षा बहुत झुकी हो, तो वास्तविक द्रव्यमान इससे अधिक हो सकता है।
प्रॉक्सिमा d के तारे के सामने से गुजरने की संभावना लगभग 2% निकाली गई थी और ऐसा पारगमन अब तक पुष्ट नहीं हुआ। इसलिए रोके गए प्रकाश से आकार नहीं मापा जा सकता और द्रव्यमान को आयतन से भाग देकर औसत घनत्व भी नहीं निकाला जा सकता। ग्रह मुख्यतः चट्टानी है या नहीं, उसका वायुमंडल है या सतह कैसी है, यह भी अज्ञात है। पृष्ठ की ग्रह छवि न्यूनतम द्रव्यमान और संभावित संरचनाओं पर आधारित चित्र है, वास्तविक तस्वीर नहीं।
प्रॉक्सिमा d के लिए निकाला गया तापमान क्या बताता है?
प्रॉक्सिमा d अपने तारे के प्रॉक्सिमा b से अधिक पास है और वासयोग्य क्षेत्र मानी गई सीमा के भी अंदर परिक्रमा करता है। इसलिए उसे b से बहुत अधिक तारकीय प्रकाश मिलता है। बाह्यग्रह आंकड़ों का लगभग 282 K तुलना का तापमान है, जिसे पहले यह तय करके निकाला गया कि ग्रह कितना प्रकाश लौटाता है और गर्मी कैसे फैलती है। इसे संतुलन तापमान कहते हैं।
वास्तविक सतही तापमान वायुमंडल की मौजूदगी, दबाव और गैसों, बादलों और दिन से रात की ओर जाने वाली गर्मी के अनुसार बहुत बदल सकता है। प्रॉक्सिमा सेंटॉरी के फ्लेयर, तेज पराबैंगनी प्रकाश और एक्स-किरणें भी किसी वायुमंडल की मात्रा और संरचना बदल सकती हैं। कोई वायुमंडल नहीं मिला है, इसलिए सतह कितनी गर्म है और वहां कैसी स्थिति है, यह अज्ञात है।
परिक्रमा अवधि, कक्षीय दूरी और तारे की गति का बदलाव अवलोकनों से मिले हैं। न्यूनतम द्रव्यमान कक्षा का झुकाव जाने बिना निकाला गया है, और संतुलन तापमान प्रकाश के परावर्तन तथा गर्मी के फैलाव की धारणाओं से। आकार, घनत्व, वायुमंडल और सतह मापे नहीं गए हैं।
- 2019–2021 ESPRESSO ने 99 रातों में लिए तारकीय प्रकाश के 117 मापों में लगभग 5.12 दिन का संकेत पाया।
- 2022 तारकीय गतिविधि को सुधारने के बाद भी संकेत रहा और प्रॉक्सिमा d को ग्रह उम्मीदवार घोषित किया गया।
- 2025 NIRPS ने 159 रातों में लिए 420 निकट-अवरक्त मापों में वही अवधि फिर पाई।
- आज ग्रह की मौजूदगी पुष्ट है, लेकिन आकार, मुख्य पदार्थ, वायुमंडल और सतह अज्ञात हैं।
प्रॉक्सिमा d के बारे में अभी और क्या जानना बाकी है?
तारे की आगे-पीछे की गति के लंबे और अधिक सटीक माप 5.12 दिन के संकेत तथा कक्षा को बेहतर बताएंगे और धब्बों व फ्लेयर से हुए बदलावों को अलग करेंगे। आकाश में तारे की बगल की गति भी मापी जा सके, तो कक्षा के झुकाव और वास्तविक द्रव्यमान की सीमा घट सकती है। लेकिन यह गति बेहद छोटी और मापने में कठिन है।
प्रॉक्सिमा d अपने तारे के इतने पास है कि आकाश में दोनों लगभग जुड़े दिखते हैं, और ग्रह बहुत कम चमकीला है। तारकीय प्रकाश से ग्रह की रोशनी अलग करके सतह से लौटे प्रकाश या ग्रह से निकली गर्मी का विश्लेषण अब भी बहुत कठिन है। आज सबसे पक्की बात यह है कि तारे की केवल 39 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति कई आंकड़ों में उसी 5.12 दिन की अवधि के साथ दिखी। यही प्रॉक्सिमा d को ग्रह मानने का प्रमाण है।
स्रोत
- Astronomy & Astrophysics — A Candidate Short-period Sub-Earth Orbiting Proxima Centauri
- ESO — New Planet Detected Around Star Closest to the Sun
- Astronomy & Astrophysics — Proxima Centauri with NIRPS
- NASA Science — Proxima Centauri d
- NASA Exoplanet Archive — Proxima Centauri System
- NASA Science — Neighboring Star’s Bad Behavior
- ESO — ESPRESSO Instrument