ब्लैक होल क्या है?
ब्लैक होल अंतरिक्ष में बना कोई खाली छेद या हर चीज़ को खींच लेने वाला ब्रह्मांडीय वैक्यूम क्लीनर नहीं है। यह ऐसा खगोलीय पिंड है जिसमें पर्याप्त द्रव्यमान एक अत्यंत छोटे क्षेत्र में सिमटकर दिक्काल को बहुत अधिक मोड़ देता है। इसके चारों ओर एक ऐसी सीमा होती है जिसके भीतर से प्रकाश या कोई संकेत बाहर नहीं जा सकता। इस सीमा को घटना क्षितिज कहते हैं। ब्लैक होल शब्द किसी एक विशेष पिंड के लिए नहीं, बल्कि ऐसी सीमा वाले सभी पिंडों की श्रेणी के लिए उपयोग होता है।
घटना क्षितिज कोई ठोस सतह नहीं है जिस पर खड़ा हुआ जा सके। बहुत दूर से देखने पर ब्लैक होल का गुरुत्व समान द्रव्यमान वाले किसी दूसरे पिंड के गुरुत्व से अलग नहीं होता। यदि कल्पना में सूर्य को उसी द्रव्यमान के ब्लैक होल से बदल दिया जाए, तब भी पृथ्वी लगभग अपनी वर्तमान कक्षा में ही घूमती रहेगी। अंतर केवल ब्लैक होल के बहुत पास पहुँचने पर महत्वपूर्ण होता है, जहाँ प्रकाश का मार्ग और समय का प्रवाह तक अत्यधिक मुड़ जाते हैं।
- घटना क्षितिज वह सीमा जिसके भीतर से सूचना बाहर वापस नहीं आ सकती
- लगभग 3 किमी × सौर द्रव्यमान न घूमने वाले ब्लैक होल के क्षितिज की त्रिज्या का सरल अनुमान
- तीन प्रेक्षित द्रव्यमान स्तर तारकीय-द्रव्यमान, मध्यवर्ती-द्रव्यमान और अतिविशाल ब्लैक होल
- अदृश्य मूल पिंड पास के तारों, गर्म गैस, गुरुत्वाकर्षण तरंगों और छाया से उपस्थिति की पुष्टि
क्या घटना क्षितिज और विलक्षणता एक ही चीज़ हैं?
घटना क्षितिज ब्लैक होल का केंद्र नहीं, उसकी बाहरी सीमा है। यदि सरलता के लिए ब्लैक होल को बिना घूर्णन और बिना विद्युत आवेश वाला मानें, तो क्षितिज की त्रिज्या उसके द्रव्यमान के समानुपाती होती है। हर सौर द्रव्यमान पर यह लगभग 3 किमी है, इसलिए सूर्य के दस गुने द्रव्यमान वाले ब्लैक होल के क्षितिज की त्रिज्या करीब 30 किमी होगी। समान द्रव्यमान को छोटी जगह में समेटने से दूर तक गुरुत्व अपने-आप अधिक शक्तिशाली नहीं हो जाता; महत्वपूर्ण यह है कि अब उन निकट क्षेत्रों तक पहुँचा जा सकता है जो पहले पदार्थ के भीतर होते।
सामान्य सापेक्षता की गणना केंद्र में एक विलक्षणता दिखाती है, जहाँ घनत्व और दिक्काल की वक्रता अनंत की ओर बढ़ते हैं। लेकिन अनंत परिणाम इस बात का संकेत भी हो सकता है कि इन परिस्थितियों में हमारा वर्तमान सिद्धांत पर्याप्त नहीं है। घटना क्षितिज के बाहर के क्षेत्र को अवलोकनों से जाँचा जा सकता है, किंतु उसके भीतर पदार्थ की अवस्था और क्वांटम यांत्रिकी को शामिल करके केंद्र का पूरा वर्णन अभी उपलब्ध नहीं है। विलक्षणता को छोटी काली गेंद के रूप में दिखाने वाले चित्र सिद्धांत के सरलीकृत निरूपण हैं, वास्तविक तस्वीरें नहीं।
हमने सीधे किसी “काले पदार्थ के ढेले” को नहीं देखा है; हमने एक अदृश्य, अत्यंत सघन क्षेत्र के चारों ओर तारों की कक्षाएँ, मुड़ा हुआ प्रकाश, गर्म गैस और गुरुत्वाकर्षण तरंगें मापी हैं।
द्रव्यमान और आकार के आधार पर ब्लैक होल कैसे बाँटे जाते हैं?
तारकीय-द्रव्यमान ब्लैक होल में सामान्यतः सूर्य के कुछ गुने से लेकर कई दर्जन गुने तक द्रव्यमान होता है। किसी भारी तारे का केंद्रीय भाग ईंधन समाप्त होने के बाद अपने ही गुरुत्व के विरुद्ध टिक न पाए, तो उसके ढहने से ऐसा ब्लैक होल बन सकता है। साथी तारे से गैस लेकर या किसी अन्य सघन पिंड से मिलकर यह और भारी हो सकता है।
अतिविशाल ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य के लाखों से लेकर अरबों गुने या उससे भी अधिक हो सकता है और वे अधिकांश बड़ी आकाशगंगाओं के केंद्र में मिलते हैं। हमारी आकाशगंगा के केंद्र में सैजिटेरियस A* और M87 आकाशगंगा के केंद्र का ब्लैक होल इसके प्रमुख उदाहरण हैं। आरंभिक ब्रह्मांड में वे किस बीज से बने और इतनी जल्दी कैसे बढ़े, इसका अभी कोई एक सर्वमान्य उत्तर नहीं है।
इन दोनों सीमाओं के बीच सूर्य के सैकड़ों से लेकर लाखों गुने द्रव्यमान वाले मध्यवर्ती-द्रव्यमान ब्लैक होल के उम्मीदवार हैं। कुछ उम्मीदवार तीव्र एक्स-किरणों या तारों की गति से मिले हैं, और ब्लैक होल विलयों से बने 100 सौर द्रव्यमान से अधिक के अवशेष भी देखे गए हैं। फिर भी हर उम्मीदवार के लिए किसी अन्य प्रकार के पिंड या तारागुच्छ जैसी वैकल्पिक व्याख्या जाँचनी पड़ती है। आरंभिक ब्रह्मांड में बने माने जाने वाले आदिम ब्लैक होल अभी केवल सैद्धांतिक संभावना हैं; उनके अस्तित्व की पुष्टि नहीं हुई है।
ब्लैक होल कैसे बढ़ते हैं और अपने आसपास को कैसे चमकाते हैं?
ब्लैक होल स्वयं न प्रकाश उत्सर्जित करता है, न उसे परावर्तित। फिर भी आसपास की गैस सीधे नीचे नहीं गिरती। कोणीय संवेग वाली गैस ब्लैक होल की परिक्रमा करके एक चपटी अभिवृद्धि चक्रिका बना सकती है। चक्रिका में घर्षण और संपीड़न पदार्थ को इतना गर्म कर देते हैं कि वह रेडियो तरंगें, दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी विकिरण और एक्स-किरणें छोड़ता है। हमें दिखाई देने वाली चमक उस पदार्थ से आती है जो अभी घटना क्षितिज के बाहर है।
कुछ ब्लैक होल के आसपास चुंबकीय क्षेत्र चक्रिका के कुछ पदार्थ को घूर्णन अक्ष के साथ तेज़ जेटों में मोड़ देते हैं। जेट घटना क्षितिज के भीतर से बाहर नहीं निकलते; उनका पदार्थ क्षितिज पार करने से पहले ही चक्रिका और चुंबकीय क्षेत्र से दिशा बदलता है। हर ब्लैक होल के पास हमेशा चमकीली चक्रिका और जेट भी नहीं होते। जिस ब्लैक होल को लगभग कोई पदार्थ नहीं मिल रहा हो, वह अत्यंत अँधेरा हो सकता है और केवल पास के पिंडों पर उसके गुरुत्वीय प्रभाव से पहचाना जा सकता है।
अदृश्य ब्लैक होल की पुष्टि कैसे की जाती है?
| अवलोकन विधि | वास्तव में दिखने वाला संकेत | उससे मिलने वाली जानकारी |
|---|---|---|
| तारों और गैस की कक्षाएँ | किसी अदृश्य बिंदु के चारों ओर तेज़ गति | केंद्रीय द्रव्यमान और उसके सिमटे क्षेत्र का आकार |
| अभिवृद्धि चक्रिका का प्रकाश | गर्म गैस से निकलती रेडियो, दृश्य और एक्स-किरणें | अंदर आते पदार्थ का तापमान, गति, चुंबकीय क्षेत्र और उम्मीदवार का स्थान |
| गुरुत्वीय लेंसिंग | अदृश्य द्रव्यमान के सामने से गुजरने पर पीछे का तारा चमकता और स्थान बदलता दिखाई देता है | बिना साथी तारे वाले अँधेरे ब्लैक होल उम्मीदवार का द्रव्यमान |
| गुरुत्वाकर्षण तरंगें | दो ब्लैक होल के सर्पिल गति करते हुए मिलने पर बनी दिक्काल की लहरें | विलय से पहले और बाद के द्रव्यमान, घूर्णन और दूरी |
| क्षितिज-पैमाने की इमेजिंग | मुड़े हुए प्रकाश का चमकीला वलय और बीच की अँधेरी छाया | तीव्र गुरुत्व में द्रव्यमान व आकार की सामान्य सापेक्षता की भविष्यवाणियों से तुलना |
क्या EHT की अँधेरी गोल छवि घटना क्षितिज है?
इवेंट होराइजन टेलीस्कोप (EHT) कई महाद्वीपों के रेडियो दूरबीनों को जोड़कर पृथ्वी के आकार की आभासी दूरबीन की तरह उपयोग करता है। उसने 2019 में M87 के केंद्रीय ब्लैक होल के चारों ओर का वलय और 2022 में हमारी आकाशगंगा के केंद्र में सैजिटेरियस A* का वलय प्रकाशित किया। बीच का अँधेरा भाग घटना क्षितिज की सतह की तस्वीर नहीं है। यह ब्लैक होल की छाया है, जो इसलिए अँधेरी दिखती है क्योंकि प्रबल गुरुत्व प्रकाश को मोड़ता और उसका कुछ भाग पकड़ लेता है।
छाया घटना क्षितिज से बड़ी दिखाई देती है। ब्लैक होल के पीछे से आने वाला प्रकाश भी मुड़कर हम तक पहुँच सकता है, जबकि कुछ विशेष रास्तों का प्रकाश कई चक्कर लगाकर चमकीला वलय बनाता है। मुख्य परिणाम यह है कि EHT से मिले वलयों का आकार और रूप, द्रव्यमान से निकाली गई सामान्य सापेक्षता की भविष्यवाणियों से मेल खाता है। ये चित्र ब्लैक होल का अंदरूनी भाग नहीं दिखाते; वे क्षितिज के ठीक बाहर के दिक्काल और गर्म प्लाज़्मा को अलग-अलग पहचानने योग्य बनाते हैं।
क्या ब्लैक होल अपने पास की हर चीज़ निगल लेता है?
ब्लैक होल से पर्याप्त दूर पिंड किसी अन्य द्रव्यमान के चारों ओर की तरह स्थिर कक्षा में रह सकते हैं। भीतर गिरने के लिए पदार्थ को दूसरे पदार्थ से टकराकर या गैस के घर्षण से ऊर्जा और कोणीय संवेग खोना पड़ता है। इसीलिए आकाशगंगा के केंद्र के अनेक तारे सीधे ब्लैक होल में नहीं गिरते, बल्कि उसकी परिक्रमा करते हैं।
बहुत पास वास्तविक खतरा ज्वारीय बल है—किसी वस्तु के पास और दूर वाले सिरों पर लगने वाले गुरुत्व का अंतर। तारकीय-द्रव्यमान ब्लैक होल का क्षितिज छोटा होता है, इसलिए पास जाते समय यह अंतर तेज़ी से बढ़ता है और वस्तु क्षितिज तक पहुँचने से पहले लंबी खिंचकर टूट सकती है। अतिविशाल ब्लैक होल का क्षितिज बहुत बड़ा होता है, इसलिए सीमा पर ज्वारीय बल अपेक्षाकृत कम हो सकता है; फिर भी उसे पार करने वाली कोई भी वस्तु वापस नहीं आ सकती।
हम क्या जानते हैं और क्या अभी अनसुलझा है?
तारों की कक्षाएँ, एक्स-किरण द्वितारे, EHT छवियाँ और गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अवलोकन अलग-अलग द्रव्यमान स्तरों पर यह प्रमाण देते हैं कि अत्यंत छोटे, अँधेरे क्षेत्र सामान्य सापेक्षता के ब्लैक होल जैसे व्यवहार करते हैं। ब्लैक होल के द्रव्यमान और घूर्णन तथा आसपास के पदार्थ की गति अब लगातार अधिक सटीकता से मापी जा रही है।
फिर भी हम नहीं जानते कि घटना क्षितिज के भीतर सूचना और पदार्थ का वर्णन कैसे किया जाए, क्वांटम सिद्धांत विलक्षणता की जगह क्या बताएगा, या पहले अतिविशाल ब्लैक होल किन बीजों से बने। ब्लैक होल न तो ऐसा पिंड है जिसके बारे में हमें कुछ पता नहीं, न ऐसा जिसके हर प्रश्न का उत्तर मिल चुका है। उसका प्रेक्षणीय बाहरी भाग सटीक विज्ञान का विषय है, जबकि भीतर का क्षेत्र और उत्पत्ति आधुनिक भौतिकी की सीमारेखा पर हैं।