तारकीय कक्षाओं से ब्लैक होल की छाया तक
धनु A* आकाशगंगा के केंद्र में स्थित महाविशाल ब्लैक होल है। जिस पिंड को सीधे नहीं देखा जा सकता, उसकी पहचान के लिए खगोलविदों ने आसपास घूमते तारों की कक्षाएँ, गर्म गैस से निकलने वाली रेडियो तरंगें और प्रबल गुरुत्व से मुड़े प्रकाश को पढ़ा। इसकी कहानी केवल एक “ब्लैक होल की तस्वीर” की नहीं, बल्कि अलग-अलग प्रेक्षणों के एक ही निष्कर्ष पर पहुँचने की कहानी है।
- दूरी
पृथ्वी से लगभग 26,700 प्रकाश-वर्ष - द्रव्यमान
सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 41.5 लाख गुना - S2 का परिक्रमण काल
लगभग 16 वर्ष - EHT वलय का व्यास
51.8 ± 2.3 माइक्रोआर्कसेकंड
आकाशगंगा का केंद्र दिखाई क्यों नहीं देता था?
धनु तारामंडल की दिशा में लगभग 26,700 प्रकाश-वर्ष पीछे देखने पर हम अपनी आकाशगंगा के केंद्र तक पहुँचते हैं। लेकिन रास्ते में मौजूद घनी अंतरतारकीय धूल दृश्य प्रकाश को रोक देती है। इसलिए खगोलविदों ने केंद्र का अध्ययन अवरक्त और रेडियो तरंगों से किया, जो धूल को अपेक्षाकृत आसानी से पार कर सकती हैं। 1974 में आकाशगंगा के केंद्र पर एक अत्यंत छोटा और शक्तिशाली रेडियो स्रोत मिला, जिसे बाद में धनु A*, संक्षेप में Sgr A*, नाम दिया गया।
केवल रेडियो स्रोत का चमकीला होना उसे ब्लैक होल सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं था। निर्णायक संकेत आसपास के तारों से मिले। यदि तारे किसी अदृश्य बिंदु के चारों ओर बहुत तेज़ी से घूमते हैं, तो उनकी कक्षा के आकार और गति से केंद्र में मौजूद द्रव्यमान की गणना की जा सकती है।
S2 ने अदृश्य द्रव्यमान का मानचित्र बनाया
इनमें प्रमुख तारा S2 लगभग हर 16 वर्ष में Sgr A* की एक परिक्रमा करता है। निकटतम बिंदु पर इसकी दूरी लगभग 120 AU—पृथ्वी और सूर्य की दूरी की करीब 120 गुना—रह जाती है और गति लगभग 7,700 km/s, यानी प्रकाश की गति का करीब 3%, पहुँचती है। S2 और अन्य तारों की स्थिति को कई दशकों तक सटीकता से मापने पर पता चला कि सूर्य के लगभग 40 लाख गुना द्रव्यमान S2 की कक्षा के भीतर एक बहुत छोटे क्षेत्र में केंद्रित है।
2018 में S2 के निकटतम आगमन के समय गुरुत्वीय लाल-विस्थापन मापा गया। इसके बाद श्वार्ज़शिल्ड अग्रगमन भी पुष्ट हुआ, जिसमें कक्षा का निकटतम बिंदु हर चक्कर में थोड़ा आगे बढ़ता है। न्यूटनियन यांत्रिकी की बंद दीर्घवृत्ताकार कक्षा के बजाय सामान्य सापेक्षता द्वारा अनुमानित रोसेट जैसी कक्षा बनती है। इस दीर्घकालीन अध्ययन ने आकाशगंगा के केंद्र के सघन महाविशाल पिंड को स्थापित किया; संबंधित कार्य के लिए राइनहार्ड गेन्ज़ेल और एंड्रिया गेज़ ने 2020 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार साझा किया।
Sgr A* का अस्तित्व किसी एक तस्वीर से सिद्ध नहीं हुआ। पहले तारकीय कक्षाओं ने उसका द्रव्यमान मापा, फिर सापेक्षतावादी प्रभावों ने उसके गुरुत्व क्षेत्र की जाँच की, और अंततः EHT ने घटना क्षितिज के पैमाने की संरचना को विभेदित किया।
EHT ने वास्तव में क्या चित्रित किया?
इवेंट होराइज़न टेलीस्कोप कोई एक दूरबीन नहीं है। अप्रैल 2017 में दुनिया की आठ वेधशालाओं की रेडियो दूरबीनों ने 1.3 mm तरंगदैर्घ्य पर एक ही लक्ष्य देखा। अति-दीर्घ आधार रेखा इंटरफेरोमेट्री ने इन्हें पृथ्वी के आकार की आभासी दूरबीन में जोड़ा। परमाणु घड़ियों से समकालित विशाल डेटा को मिलाकर तैयार परिणाम 2022 में जारी हुआ।
चित्र का नारंगी वलय ब्लैक होल की सतह या घटना क्षितिज स्वयं नहीं है। आसपास के गर्म प्लाज़्मा की रेडियो तरंगें प्रबल गुरुत्व से मुड़कर अनेक रास्तों से हम तक पहुँचती हैं और चमकीला वलय बनाती हैं। बीच का अँधेरा भाग ब्लैक होल की छाया है, जो घटना क्षितिज से बड़ा दिखता है और प्रकाश के फँसने तथा आसपास प्रकाश की कमी से बनता है। मापा गया मोटे वलय का व्यास 51.8 ± 2.3 माइक्रोआर्कसेकंड था, जो लगभग 40 लाख सौर-द्रव्यमान वाले केर (Kerr) ब्लैक होल के लिए सामान्य सापेक्षता के अनुमान से मेल खाता है।
पास होने पर भी M87* से कठिन क्यों था?
Sgr A*, M87 आकाशगंगा के ब्लैक होल से बहुत निकट है, फिर भी उसका चित्र बनाना अधिक कठिन था। दोनों के आसपास गैस लगभग प्रकाश की गति से चलती है, पर Sgr A* का द्रव्यमान और आकार बहुत कम होने के कारण गैस कुछ ही मिनटों में वलय का एक चक्कर लगा लेती है। पृथ्वी भर की दूरबीनें कई घंटों तक डेटा जुटाती रहीं, जबकि लक्ष्य की चमक और संरचना लगातार बदलती रही।
इसलिए प्रकाशित परिणाम किसी स्थिर क्षण की सामान्य तस्वीर नहीं है। शोधकर्ताओं ने अलग-अलग समय-परिवर्तन वाले मॉडलों से अनेक पुनर्निर्मित छवियाँ बनाईं और स्वतंत्र एल्गोरिदमों में समान रूप से बचने वाले वलय तथा केंद्रीय मंदता को प्रतिनिधि छवियों में समेटा। स्वतंत्र पुनर्विश्लेषण के लिए EHT का डेटा और विश्लेषण-विधि भी सार्वजनिक की गई।
शांत, पर निष्क्रिय नहीं
अन्य आकाशगंगाओं के सक्रिय गांगेय नाभिकों की तुलना में Sgr A* बहुत मंद और शांत है। यह आसपास की हर चीज़ को खींच लेने वाला ब्रह्मांडीय वैक्यूम क्लीनर नहीं है; केवल बहुत पास आने वाली थोड़ी-सी गैस का अभिवृद्धि करता है। पर्याप्त दूरी पर तारे उसी द्रव्यमान के किसी भी पिंड की तरह स्थिर कक्षाओं में रहते हैं। भीतर जाने वाला प्लाज़्मा, हालांकि, गर्म होता है, तेज़ी से बदलता है और कभी-कभी अवरक्त तथा एक्स-किरण फ्लेयर पैदा करता है।
2024 की EHT ध्रुवित छवि ने छाया के पास प्रबल, मुड़े हुए और अपेक्षाकृत सुव्यवस्थित चुंबकीय क्षेत्र दिखाए। बहुत बड़े M87* के आसपास के क्षेत्रों से उनकी समानता संकेत देती है कि महाविशाल ब्लैक होल पदार्थ ग्रहण करने और बहिर्वाह बनाने में अलग-अलग आकारों पर समान भौतिकी अपना सकते हैं। फिर भी Sgr A* का जेट अभी पुष्ट तथ्य नहीं है; यह प्रेक्षण से जाँची जाने वाली परिकल्पना है।
प्रेक्षणीय प्रमाण कैसे पढ़ें
| प्रेक्षण | सीधे क्या पता चलता है | व्याख्या में सावधानी |
|---|---|---|
| S2 और केंद्रीय तारों की कक्षाएँ | केंद्रीय द्रव्यमान और दूरी, तथा प्रबल गुरुत्व क्षेत्र में सापेक्षतावादी प्रभाव | इन प्रेक्षणों में ब्लैक होल की सतह नहीं देखी गई। |
| EHT की कुल-तीव्रता छवि | घटना क्षितिज के पैमाने का वलय और केंद्र में घटा प्रकाश | नारंगी वलय ठोस सतह नहीं, रेडियो उत्सर्जन का पुनर्निर्माण है। |
| EHT की ध्रुवित छवि | प्लाज़्मा से जुड़े चुंबकीय क्षेत्रों की दिशा और व्यवस्था | छिपे जेट की संभावना, जेट की प्रत्यक्ष खोज के समान नहीं है। |
ये आँकड़े अनुमानित हैं और इनमें प्रेक्षण मॉडल तथा अनिश्चितताएँ शामिल हैं। विशेष रूप से “छाया”, “घटना क्षितिज” और “चमकीला वलय” एक ही सीमा के नाम नहीं हैं।
स्रोत
- Event Horizon Telescope Collaboration — First Sagittarius A* EHT Results I
- Event Horizon Telescope — First image of the Milky Way black hole
- ESO — S2 Schwarzschild precession around Sagittarius A*
- NASA — What is the center of our galaxy like?
- Event Horizon Telescope — Polarized view of Sagittarius A*