तारे का अंतिम परिणाम उसके द्रव्यमान और विकास पर निर्भर करता है
तारे की मृत्यु उसके विकास की उन अंतिम प्रक्रियाओं को कहते हैं जिनमें नाभिकीय संलयन से लंबे समय तक चमकने के बाद वह एक छोटा, सघन अवशेष छोड़ता है या अपना पदार्थ अंतरिक्ष में बिखेर देता है। सूर्य जैसे तारों के श्वेत बौने छोड़ने की अपेक्षा है, जबकि बहुत अधिक द्रव्यमान वाले तारों से न्यूट्रॉन तारे या ब्लैक होल बन सकते हैं। अंतिम परिणाम तारे के द्रव्यमान और उसमें पहले हुए बदलावों पर निर्भर करता है।
यहाँ द्रव्यमान का अर्थ तारे को बनाने वाले पदार्थ की मात्रा है। यह त्रिज्या से अलग है, जो तारे के भौतिक आकार को बताती है। तारे के बहुत फूल जाने का अर्थ यह नहीं कि उसका पदार्थ भी उसी अनुपात में बढ़ गया; फैलते समय वह बाहरी पदार्थ खो भी सकता है।
नाभिकीय संलयन तारे के भीतर की गर्मी और प्रकाश बनाए रखता है
सूर्य के केंद्र में हल्के परमाणु नाभिक जुड़ते हैं; इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन कहते हैं। हाइड्रोजन के नाभिकों से हीलियम के नाभिक बनने पर निकली ऊर्जा अंदरूनी भाग को गर्म रखती है और अंततः प्रकाश के रूप में अंतरिक्ष में निकलती है। जिस लंबे दौर में तारा अपने केंद्र में हाइड्रोजन का संलयन जारी रखता है, उसे मुख्य अनुक्रम अवस्था कहते हैं।
गुरुत्वाकर्षण तारे के पदार्थ को अंदर की ओर खींचता है। दूसरी ओर, गर्म गैस और प्रकाश दाब उत्पन्न करते हैं, और भीतर की ओर अधिक दाब होने से बाहर की ओर बल लगता है। मुख्य अनुक्रम का तारा इन दोनों प्रभावों के लगभग संतुलन में रहने पर अपनी संरचना बनाए रखता है।
केंद्र में उपलब्ध हाइड्रोजन घटने पर ऊर्जा बनने का तरीका और तारे की संरचना बदलते हैं। केंद्र का हाइड्रोजन समाप्त होने के बाद भी उसके चारों ओर की परत में हाइड्रोजन की अभिक्रियाएँ, या और गर्म हो चुके केंद्र में हीलियम की अभिक्रियाएँ हो सकती हैं। आगे के ईंधन और नाभिकीय अभिक्रियाएँ तारे के द्रव्यमान और विकास की अवस्था पर निर्भर करती हैं।
सूर्य जैसे तारे बाहरी परतें खोकर एक गर्म केंद्रीय भाग छोड़ते हैं
केंद्र का हाइड्रोजन समाप्त होने के बाद सूर्य जैसे तारों की अंदरूनी संरचना बदलती है और वे दानव तारे की अवस्थाओं से गुजरते हैं, जिनमें बाहरी परतें बहुत फैल जाती हैं। इस विकास के दौरान केंद्र के हीलियम से कार्बन और ऑक्सीजन बनते हैं। तारा बाहरी पदार्थ अंतरिक्ष में छोड़ता है और अंत में उसका छोटा, गर्म केंद्रीय भाग खुल जाता है।
बचा हुआ यह केंद्रीय भाग श्वेत बौना है। श्वेत बौना बहुत सघन पिंड है, जिसमें पृथ्वी के समान आकार के भीतर सूर्य से तुलना योग्य द्रव्यमान समाया होता है। केंद्रीय संलयन से नई ऊर्जा मिलना बंद होने के बाद भी वह जमा हुई गर्मी छोड़ते हुए लंबे समय तक चमक सकता है। सूर्य के भविष्य के लिए भी इसी मार्ग की अपेक्षा की जाती है।
सूर्य के भविष्य का अनुमान कई तारों और उनके अवशेषों के प्रेक्षणों को तारकीय विकास के सिद्धांत से मिलाकर लगाया जाता है। हमने सूर्य के दानव तारा बनने और फिर श्वेत बौना छोड़ने की पूरी प्रक्रिया पहले ही देख नहीं ली है।
बहुत अधिक द्रव्यमान वाले तारों का केंद्रीय भाग ढह सकता है
सूर्य से बहुत अधिक द्रव्यमान वाले तारों का केंद्रीय तापमान और ऊँचा हो सकता है, और वे कार्बन तथा ऑक्सीजन से भारी तत्व बनाने की अवस्थाओं से गुजर सकते हैं। जिस केंद्रीय भाग में लौह-समूह के तत्व जमा हो गए हों, वहाँ संलयन से और भारी परमाणु नाभिक बनाकर ऊर्जा प्राप्त करना कठिन होता है। यदि केंद्रीय भाग का द्रव्यमान बढ़ता रहे और अंदरूनी दाब गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध उसे संभाल न सके, तो वह तेजी से ढह सकता है।
यदि ढहने के दौरान निकली ऊर्जा का कुछ हिस्सा बाहरी परतों को बाहर धकेलता है, तो बहुत चमकीला विस्फोट होता है। इसे कोर-पतन सुपरनोवा कहते हैं। बाहरी पदार्थ अंतरिक्ष में फैल जाता है और केंद्र में बहुत छोटा अवशेष बच सकता है। विस्फोट कैसे होता है और किस प्रकार का अवशेष बचता है, इसकी बारीकियों का अध्ययन प्रेक्षणों और गणनाओं से किया जाता है।
न्यूट्रॉन तारा ऐसा सघन अवशेष है जिसका पदार्थ न्यूट्रॉनों से बहुत समृद्ध होता है; न्यूट्रॉन परमाणु नाभिक में पाए जाने वाले कणों में से एक हैं। उसके सबसे गहरे अंदरूनी भाग में पदार्थ किस अवस्था में है, इस पर अभी शोध जारी है। यदि बचे केंद्रीय भाग का द्रव्यमान पर्याप्त अधिक हो और परिस्थितियाँ ढहना जारी रहने दें, तो ब्लैक होल बन सकता है। ब्लैक होल की एक ऐसी सीमा होती है जिसके भीतर से प्रकाश या संकेत बाहर नहीं भेजे जा सकते।
बचे हुए पिंडों के प्रेक्षण से अलग-अलग मार्ग पहचाने जाते हैं
सुपरनोवा के अवशेष क्रैब नीहारिका में फैलता हुआ पदार्थ और तेजी से घूमता न्यूट्रॉन तारा देखा जाता है। खगोलशास्त्री अवशेषों के प्रकाश और गति का अध्ययन करके विस्फोट से पहले के तारे और विस्फोट की प्रक्रिया का पता लगाते हैं। बचे हुए पिंड तारे की मृत्यु की व्याख्याओं को वास्तविक प्रेक्षणों से मिलाने का अवसर देते हैं।
प्रारंभिक द्रव्यमान के अलावा, तारे ने कितना पदार्थ खोया और पास के तारे से उसकी कैसी परस्पर क्रिया हुई, यह भी महत्वपूर्ण है। गुरुत्वाकर्षण से बँधे और एक-दूसरे की परिक्रमा करते दो तारों को द्वितारा तंत्र कहते हैं; पास-पास के द्वितारों में पदार्थ एक तारे से दूसरे में जा सकता है। खगोलशास्त्री Ia प्रकार के सुपरनोवा का भी अध्ययन करते हैं, जिनमें द्वितारा तंत्र का श्वेत बौना विस्फोटक नाभिकीय अभिक्रियाओं से नष्ट होता है। यह मार्ग बहुत अधिक द्रव्यमान वाले तारे के केंद्रीय भाग के ढहने से अलग है।
- सूर्य जैसे तारे का प्रतिनिधि मार्ग वह दानव तारे की अवस्थाओं से गुजरकर बाहरी परतें खोता है और श्वेत बौना छोड़ता है।
- बहुत अधिक द्रव्यमान वाले तारे का प्रतिनिधि मार्ग केंद्रीय भाग ढहने के बाद परिस्थितियों के अनुसार न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल बच सकता है।
ये दो मार्ग पूरी प्रक्रिया की बड़ी तस्वीर समझाने वाले सारांश हैं। हर अधिक द्रव्यमान वाला तारा चमकीला सुपरनोवा बनकर एक ही प्रकार का अवशेष नहीं छोड़ता। तारे के अंतिम परिणाम का सटीक अनुमान लगाने के लिए केवल द्रव्यमान से अधिक परिस्थितियाँ देखनी पड़ती हैं।
निकला हुआ पदार्थ अगली पीढ़ी के तारों और ग्रहों की सामग्री में मिलता है
तारे से निकला बाहरी पदार्थ तारों के बीच की गैस में मिल जाता है, और उसका कुछ हिस्सा बाद में नए तारों और ग्रह-तंत्रों में शामिल होता है। इसमें वे तत्व भी होते हैं जो तारे में शुरू से थे और वे भी जो उसकी अंदरूनी नाभिकीय अभिक्रियाओं में बने। नए तत्वों के बनने और पहले से मौजूद तत्वों के अंतरिक्ष में फैलने की प्रक्रियाओं को अलग समझा जा सकता है।
सौरमंडल बनाने वाले पदार्थ में भी सूर्य से पहले मौजूद पिंडों के छोड़े घटक शामिल हैं। हाइड्रोजन जैसे कुछ घटक शुरुआती ब्रह्मांड से आए हैं, इसलिए आसपास के सभी तत्वों को एक ही प्रकार के सुपरनोवा की उपज नहीं माना जा सकता। तारों ने क्या छोड़ा, इसका अध्ययन हमें समझने में मदद करता है कि बाद के तारों और ग्रहों की सामग्री कहाँ से आई।
स्रोत
- NASA Webb — तारकीय संलयन और अंदरूनी संतुलन
- NASA Science — तारकीय विकास और श्वेत बौने
- NASA — सूर्य के भविष्य पर विशेषज्ञ की व्याख्या
- NASA Hubble — तारों की मृत्यु और क्रैब नीहारिका के प्रेक्षण
- NASA — न्यूट्रॉन तारों के अंदरूनी भाग पर शोध
- Burrows और Vartanyan — कोर-पतन सुपरनोवा के सिद्धांत की समीक्षा
- ESA Integral — श्वेत बौने और Ia प्रकार के सुपरनोवा