बिना ईंधन के श्वेत बौना कैसे चमकता है?
श्वेत बौना वह गर्म केंद्र है जो सूर्य जैसे कम या मध्यम द्रव्यमान वाले तारे के जीवन के अंत में बाहरी परतें खो देने के बाद बचता है। उसके केंद्र में लगभग कोई नई संलयन ऊर्जा नहीं बनती, लेकिन आरंभ में वह बहुत गर्म होता है और संचित ऊष्मा को अंतरिक्ष में छोड़ते हुए चमकता है। पृथ्वी जितने आकार में सूर्य के तुलनीय द्रव्यमान के समा जाने से उसका घनत्व बहुत अधिक होता है।
- पहचान सक्रिय मुख्य-अनुक्रम तारा नहीं, बल्कि तारकीय विकास से बचा अवशेष
- आकार सामान्यतः पृथ्वी जितना, लेकिन द्रव्यमान सूर्य के तुलनीय हो सकता है।
- सहारा इलेक्ट्रॉन अपकर्ष दाब गुरुत्वीय संकुचन का विरोध कर छोटे आकार को बनाए रखता है।
- प्रकाश नया ईंधन जलाने के बजाय बची हुई ऊष्मा छोड़ते हुए धीरे-धीरे ठंडा होता है।
इतना छोटा होकर भी वह ढहता क्यों नहीं?
सामान्य तारे में गर्म गैस का दाब गुरुत्व का विरोध करता है। श्वेत बौने में क्वांटम यांत्रिकी से उत्पन्न इलेक्ट्रॉन अपकर्ष दाब मुख्य भूमिका निभाता है। इलेक्ट्रॉन एक ही अवस्था को असीमित रूप से साझा नहीं कर सकते, इसलिए वे पदार्थ को और दबाने वाले गुरुत्व का प्रतिरोध करते हैं। एक असामान्य गुण यह है कि श्वेत बौने का द्रव्यमान बढ़ने पर उसकी त्रिज्या घटती है। इस सहारे की भी सीमा है: चंद्रशेखर सीमा कहलाने वाले लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान के आसपास से अधिक द्रव्यमान वाला स्थिर श्वेत बौना बने रहना कठिन है।
श्वेत बौने की सफेद चमक कोई नई ज्वाला नहीं, बल्कि तारे के गर्म अंतिम केंद्र के धीरे-धीरे ठंडा होने की बची हुई आभा है।
श्वेत बौना कैसे बनता है?
- मुख्य-अनुक्रम तारा सूर्य जैसा तारा अपने केंद्र में हाइड्रोजन का संलयन करता है।
- दानव अवस्था केंद्रीय ईंधन बदलने पर बाहरी भाग फैलता है और तारा द्रव्यमान खोता है।
- बाहरी परतों का निष्कासन बाहर की गैस फैलकर ग्रहीय नीहारिका बना सकती है।
- श्वेत बौना खुला हुआ गर्म केंद्र बिना संलयन के लंबे समय तक ठंडा होता है।
बचे हुए केंद्र का मुख्य पदार्थ तारे के आरंभिक द्रव्यमान और विकास के अनुसार हीलियम, कार्बन व ऑक्सीजन, या उनसे भारी तत्व हो सकता है। अनुमान है कि सूर्य अंततः मुख्यतः कार्बन और ऑक्सीजन से बना श्वेत बौना छोड़ेगा।
ठंडा होते समय उसके भीतर क्या होता है?
श्वेत बौने के ठंडा होने की गति किसी साधारण तापमापी की तरह स्थिर नहीं होती। जब अंदर के आयन नियमित संरचना बनाकर क्रिस्टलीकृत होने लगते हैं, तो गुप्त ऊष्मा और तत्वों का पृथक्करण शीतलन की गति को प्रभावित कर सकते हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के Gaia प्रेक्षणों ने अनेक श्वेत बौनों की चमक और रंग के वितरण में इस क्रिस्टलीकरण से पैदा हुई देरी के संकेत दिखाए। यह ‘श्वेत बौने का भीतरी भाग ठोस होता है’ वाली पुरानी भविष्यवाणी की बड़ी आबादी के प्रेक्षणों से पुष्टि का उदाहरण है।
साथी तारा होने पर घटनाएँ अधिक उग्र क्यों हो सकती हैं?
अकेला श्वेत बौना सामान्यतः शांतिपूर्वक ठंडा होता है। पास में साथी तारा हो तो वह गैस खींच सकता है; सतह पर विस्फोटक नाभिकीय संलयन होने से नोवा बन सकता है। कुछ द्वितारा विकास मार्गों में श्वेत बौने का विनाश Ia प्रकार के सुपरनोवा से जुड़ता है। हालांकि Ia सुपरनोवा के कई संभावित मार्गों पर शोध जारी है, इसलिए यह कहना सही नहीं कि ‘सीमा पार करते ही विस्फोट हमेशा एक ही तरह होता है।’ साथी तारे का प्रकार और द्रव्यमान स्थानांतरण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हैं।
श्वेत बौना प्रेक्षणों में मिला तारकीय अवशेष है। बहुत अधिक ठंडा हो जाने के बाद की कल्पित अवस्था, काला बौना, अभी तक नहीं देखा गया है।
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