भूरा बौना तारा है या ग्रह?
भूरा बौना गैस और धूल के बादल के सिकुड़ने से तारे की तरह जन्म लेता है, लेकिन वह ऐसा उपतारकीय पिंड है जिसका द्रव्यमान केंद्र में सामान्य हाइड्रोजन संलयन बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं होता। कुछ भूरे बौने जीवन के आरंभ में ड्यूटेरियम या लिथियम जला सकते हैं, इसलिए यह कहना गलत है कि वे “कोई संलयन कर ही नहीं सकते।” बहुत से भूरे बौने ग्रहों से भारी होते हैं, फिर भी केवल एक द्रव्यमान संख्या से उनकी पहचान पूरी तरह तय नहीं होती।
- पहचान लगातार हाइड्रोजन संलयन बनाए न रख सकने वाला उपतारकीय पिंड
- प्रकाश वह जन्म के समय बची ऊष्मा छोड़ता है और समय के साथ ठंडा व मंद होता जाता है।
- प्रेक्षण ठंडे वायुमंडल के कारण उसे दृश्य प्रकाश की अपेक्षा अवरक्त में खोजना आसान है।
- वर्गीकरण कम तापमान की दिशा में भूरे बौने मुख्यतः M, L, T और Y वर्णक्रमीय वर्गों में आते हैं।
द्रव्यमान की सीमा एक सीधी रेखा क्यों नहीं है?
लोकप्रिय विवरण भूरे बौनों को अक्सर लगभग 13 से 80 बृहस्पति द्रव्यमान के बीच रखते हैं। निचली संख्या ड्यूटेरियम संलयन की परिस्थितियों से और ऊपरी संख्या सामान्य हाइड्रोजन संलयन को बनाए रखने की परिस्थितियों से जुड़ी है। लेकिन ये सीमाएँ रासायनिक संरचना, आयु और चुनी गई परिभाषा के साथ बदलती हैं। अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ भी ग्रहों और भूरे बौनों के बीच कोई एक सार्वभौमिक ऊपरी सीमा तय नहीं करता। इसलिए 13 और 80 उपयोगी संकेतक हैं, हर पिंड को अपने-आप वर्गीकृत करने वाले नियम नहीं।
भूरा बौना “असफल तारा” नहीं, बल्कि अपने वायुमंडल और मौसम वाला उपतारकीय पिंड है।
L, T और Y वर्णक्रमीय वर्ग क्या बताते हैं?
| वर्णक्रमीय वर्ग | वायुमंडल के प्रमुख लक्षण | ध्यान रखने योग्य बात |
| L | गर्म धूल, संघनित बादल और धातु हाइड्राइड के लक्षण दिखाई देते हैं। | कुछ बहुत छोटे तारे भी L-वर्ग के हो सकते हैं। |
| T | मीथेन का अवशोषण स्पष्ट होता है और बादलों की संरचना बदलती है। | वर्णक्रमीय वर्ग मुख्यतः वायुमंडलीय तापमान और वर्णक्रम बताता है, द्रव्यमान नहीं। |
| Y | अब तक ज्ञात सबसे ठंडे भूरे बौने इस वर्ग में आते हैं। | कम तापमान पर रसायन और बादल मॉडल अधिक जटिल हो जाते हैं। |
इतने ठंडे पिंड में अध्ययन करने को इतना कुछ क्यों है?
भूरे बौनों के वायुमंडल में बादल, हवाएँ, आणविक अवशोषण और चमक में बदलाव दिखाई देते हैं। कुछ में ध्रुवीय ज्योति और असंतुलित रसायन के संकेतों का भी अध्ययन होता है। उनका द्रव्यमान तारों और विशाल ग्रहों के बीच है, जबकि आकार प्रायः बृहस्पति जैसा होता है; इसलिए वे दिखाते हैं कि अधिक गुरुत्व और कम तापमान वायुमंडल को कैसे प्रभावित करते हैं। किसी तारे की रोशनी में न दबने वाले स्वतंत्र रूप से घूमते भूरे बौने, विशाल बाह्यग्रहों के वायुमंडल को समझने की प्राकृतिक प्रयोगशाला भी हैं।
भूरे बौने और विशाल ग्रह में अंतर कैसे किया जाए?
एक दृष्टिकोण निर्माण-पथ को देखता है। भूरे बौने तारों की तरह आणविक बादल के अपने गुरुत्व से सिकुड़ने पर बनते हैं, जबकि ग्रह सामान्यतः तारों के चारों ओर की चक्रिकाओं में बढ़ते हैं। वास्तविक ब्रह्मांड में निर्माण इतिहास को सीधे पुनर्निर्मित करना कठिन है, और स्वतंत्र रूप से घूमते ग्रह-द्रव्यमान पिंड भी मिले हैं। द्रव्यमान, कक्षा संबंध, वायुमंडल और आसपास के वातावरण को साथ देखना पड़ता है; वैज्ञानिक शब्दावली भी पूरी तरह एकरूप नहीं है। इसलिए यह पृष्ठ भूरे बौने को ग्रह और तारे के बीच “उपतारकीय पिंड” के रूप में प्रस्तुत करता है और बताता है कि सीमा पर बहस अभी जारी है।
लगातार हाइड्रोजन संलयन का अभाव मुख्य विशेषता है, लेकिन इससे थोड़े समय के ड्यूटेरियम या लिथियम संलयन की संभावना समाप्त नहीं होती।
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