सूर्य को ‘पीला बौना’ क्यों कहा जाता है?
सूर्य G-प्रकार का मुख्य-अनुक्रम तारा है, जिसे आम तौर पर पीला बौना कहा जाता है। ‘बौना’ का अर्थ यह नहीं कि सूर्य असाधारण रूप से छोटा तारा है; यह एक ऐतिहासिक नाम है जो केंद्र में हाइड्रोजन संलयन वाली मुख्य-अनुक्रम अवस्था को दर्शाता है। ‘पीला’ भी आँखों को दिखने वाला कोई स्थायी रंग नहीं, बल्कि सतह के तापमान और वर्णक्रमीय गुणों का नाम है। अंतरिक्ष में सूर्य के पूरे प्रकाश को साथ देखने पर वह लगभग सफेद दिखाई देता है।
- वर्गीकरण सूर्य G2 V प्रकार का है। G2 वर्णक्रम प्रकार और V मुख्य-अनुक्रम दीप्ति वर्ग को दर्शाता है।
- ऊर्जा स्रोत केंद्र में हाइड्रोजन को हीलियम में बदलने वाला नाभिकीय संलयन प्रकाश और ऊष्मा बनाता है।
- वर्तमान आयु सूर्य लगभग 4.5 अरब वर्ष पुराना है और अपने मुख्य-अनुक्रम जीवन के मध्य में है।
- भविष्य लगभग 5 अरब वर्ष बाद इसके लाल दानव बनने और अंततः श्वेत बौना छोड़ने का अनुमान है।
G प्रकार और V संकेत का अलग-अलग क्या अर्थ है?
तारों के O, B, A, F, G, K और M वर्णक्रम वर्ग मुख्यतः सतह के तापमान और अवशोषण रेखाओं के स्वरूप के अनुसार क्रमबद्ध हैं। NASA की जनसामान्य के लिए दी गई श्रेणी में G-प्रकार के मुख्य-अनुक्रम तारों का सतही तापमान लगभग 5,300 से 6,000 केल्विन बताया गया है। रोमन अंक V उसी तापमान क्षेत्र के दानव या महादानव तारों से अलग करने वाला दीप्ति वर्ग है। इसलिए केवल ‘G प्रकार’ विकास अवस्था को पूरी तरह तय नहीं करता; G-प्रकार और मुख्य-अनुक्रम, दोनों सूचनाएँ साथ पढ़नी चाहिए।
सूर्य को पीला बौना कहना रंगों की तालिका नहीं, बल्कि वर्णक्रम और मुख्य-अनुक्रम अवस्था से मिलकर बना उसका पता है।
सूर्य का प्रकाश उसके केंद्र में कैसे शुरू होता है?
सूर्य के केंद्र में अत्यधिक तापमान और दाब के कारण प्रोटॉन कई चरणों से गुजरकर हीलियम नाभिक बनाते हैं। इस प्रक्रिया में द्रव्यमान का एक भाग ऊर्जा में बदलता है। ऊर्जा विकिरण क्षेत्र और संवहन क्षेत्र से होकर सतह तक पहुँचती है, फिर प्रकाश और ऊष्मा के रूप में अंतरिक्ष में फैलती है। मुख्य-अनुक्रम तारे में भीतर की ओर दबाने वाला गुरुत्व और बाहर की ओर सहारा देने वाली गर्म गैस व विकिरण लगभग संतुलित रहते हैं। इसी संतुलन से सूर्य मानवीय समयमान पर स्थिर दिखाई देता है।
क्या सभी पीले बौने सूर्य जैसे ही होते हैं?
एक ही G-प्रकार के मुख्य-अनुक्रम तारों का द्रव्यमान, आयु, घूर्णन और धातु की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। ये अंतर चमक, चुंबकीय गतिविधि, जीवनकाल और ग्रह-तंत्र के वातावरण को प्रभावित करते हैं। NASA की शब्दावली में दिया गया सूर्य के लगभग 84 से 115 प्रतिशत द्रव्यमान वाला पीले बौनों का विस्तार भी समझने के लिए एक मार्गदर्शक है, कोई कठोर सीमा नहीं। सूर्य हमारे लिए सबसे विस्तार से देखा गया G-प्रकार का तारा है, लेकिन हर पीला बौना उसकी हूबहू प्रतिलिपि नहीं है।
‘सूर्य जैसा तारा’ पढ़ते समय जाँचें कि समानता केवल द्रव्यमान में है या तापमान, आयु और रासायनिक संरचना में भी।
सूर्य अपने जीवन का अंत किस क्रम में करेगा?
- वर्तमान लगभग 4.5 अरब वर्ष पुराना G-प्रकार का मुख्य-अनुक्रम तारा, जो केंद्र में हाइड्रोजन का संलयन करता है।
- लगभग 5 अरब वर्ष बाद केंद्रीय हाइड्रोजन घटने पर बाहरी भाग बहुत फैलेंगे और सूर्य लाल दानव अवस्था में जाएगा।
- बाहरी परतों का निष्कासन बाहर की गैस अंतरिक्ष में छोड़कर ग्रहीय नीहारिका बन सकती है।
- अंतिम अवशेष गर्म केंद्र श्वेत बौने के रूप में बचेगा और लंबे समय तक ठंडा होगा।
यह भविष्यवाणी सूर्य के द्रव्यमान और मौजूदा प्रेक्षणों को तारकीय विकास मॉडलों में रखकर की गई है। समय के विवरण में अनिश्चितता है, लेकिन यह व्यापक क्रम अच्छी तरह स्थापित है कि सूर्य सुपरनोवा बनने जितना भारी नहीं है और अंत में श्वेत बौना छोड़ेगा।
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