तारे की शुरुआत अंतरिक्ष के गैस के बादल में होती है
गुरुत्वाकर्षण जब अंतरिक्ष में बिखरी गैस को एक जगह इकट्ठा करता है, तो तारे के बनने की शुरुआत होती है। कुछ जगहों पर ठंडी गैस और धूल बादलों के रूप में जमा होती हैं। जब बादल का कोई हिस्सा भीतर की ओर सिमटता है, तो केंद्र में अधिक गैस जमा होने लगती है और वह गर्म होता जाता है। आज के ब्रह्मांड में बहुत से तारों की शुरुआत इसी तरह होती है।
इन बादलों का मुख्य घटक हाइड्रोजन है। ठंडे बादलों में हाइड्रोजन के अणु बहुतायत में होते हैं। हर अणु में दो परमाणु जुड़े होते हैं, इसलिए इन्हें आणविक बादल कहते हैं। गैस में धूल भी मिली होती है, जो ठोस पदार्थ के बेहद छोटे कण हैं। एक बड़े बादल से कई तारे बन सकते हैं।
गैस इकट्ठी होने पर केंद्र अधिक सघन और गर्म होता है
गैस के बादल में कुछ जगहों पर बाकी जगहों से अधिक पदार्थ जमा होता है। गुरुत्वाकर्षण के कारण यह पदार्थ एक-दूसरे को खींचता है। लेकिन गैस का बाहर की ओर धकेलने वाला दबाव और बादल की हलचल भी असर डालते हैं, इसलिए हर हिस्सा तुरंत एक जगह नहीं सिमट जाता। जहाँ गुरुत्वाकर्षण का असर अधिक होता है, वहाँ गैस भीतर की ओर इकट्ठी होकर कम जगह घेरने लगती है। इस बदलाव को संकुचन कहते हैं।
भीतर की ओर गिरती और दबती गैस गर्म होती है। शुरू में गैस और धूल प्रकाश के रूप में ऊर्जा आसानी से बाहर निकाल पाती हैं, इसलिए बादल अपेक्षाकृत ठंडा रह सकता है। लेकिन केंद्र में गैस बहुत सघन हो जाने पर ऊर्जा का बाहर निकलना कठिन हो जाता है। गर्मी जमा होने लगती है और ठंडे बादल के बीच एक गर्म केंद्र बनता है।
बादल का सारा पदार्थ एक ही तारे में नहीं पहुँचता। बादल कई हिस्सों में बँट सकता है। पास के तारों की रोशनी और उनसे निकलती पदार्थ की धाराएँ आसपास की गैस को बिखेर सकती हैं। चुंबकीय क्षेत्र और गैस की अनियमित हलचल भी संकुचन को प्रभावित करते हैं।
पदार्थ इकट्ठा करता प्रोटोस्टार पहले से चमकता है
केंद्र में इकट्ठी गैस एक गर्म पिंड बनाती है, जिसकी ओर आसपास की गैस खिंचती रहती है। बादल के बीच पदार्थ इकट्ठा करके आकार ले रहे इस युवा खगोलीय पिंड को प्रोटोस्टार कहते हैं। यहाँ बढ़ने का मतलब है कि और गैस जुड़ने से उसमें पदार्थ की मात्रा बढ़ती है।
प्रोटोस्टार इस चरण में भी प्रकाश छोड़ता है। उसे ऊर्जा भीतर की ओर गिरती और दबती गैस से मिलती है। वह उस लंबे चरण से पहले ही चमक सकता है, जिसमें सूर्य की तरह उसके केंद्र में हाइड्रोजन का संलयन ऊर्जा देता है।
भीतर आती गैस घूम भी रही होती है, इसलिए सारी गैस सीधे केंद्र में नहीं गिरती। उसका कुछ हिस्सा प्रोटोस्टार के चारों ओर घूमते हुए एक चपटी डिस्क बनाता है। इस डिस्क की गैस भीतर की ओर जाती है, तो प्रोटोस्टार में पदार्थ जुड़ता है। कुछ पदार्थ बाहर भी निकलता है, इसलिए बादल की सारी सामग्री तारे का हिस्सा नहीं बनती।
सूर्य के करीब द्रव्यमान वाला तारा आसपास से सबसे तेजी से पदार्थ इकट्ठा करने का दौर बीतने के बाद भी सिकुड़ता रहता है। द्रव्यमान किसी पिंड में मौजूद पदार्थ की मात्रा है; यह उसके दिखाई देने वाले आकार से अलग है। युवा तारा सिकुड़कर छोटा होते समय भी केंद्र में अधिक गर्म हो सकता है।
केंद्र में हाइड्रोजन का संलयन मुख्य अनुक्रम का लंबा चरण शुरू करता है
केंद्र की गैस पर्याप्त सघन और गर्म होने पर हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच के हिस्से, यानी नाभिक, ऐसी प्रतिक्रियाओं में भाग लेते हैं जिनसे हीलियम के नाभिक बनते हैं। इस प्रक्रिया को हाइड्रोजन का नाभिकीय संलयन कहते हैं। इससे तारे को चमकते रहने के लिए ऊर्जा मिलती है। केंद्र में हाइड्रोजन के संलयन से ऊर्जा पाकर चमकने वाला लंबा दौर मुख्य अनुक्रम कहलाता है। सूर्य अभी इसी चरण में है।
तारे के भीतर पदार्थ को अंदर खींचने वाले गुरुत्वाकर्षण और गर्म गैस तथा प्रकाश के दबाव के बाहर की ओर पड़ने वाले प्रभाव में लगभग संतुलन होता है। तारा लगातार ऊर्जा बाहर छोड़ता है, फिर भी संलयन लंबे समय तक इस स्थिति को बनाए रखने में मदद करता है। प्रोटोस्टार पहले भी चमक रहा था, लेकिन अब उसे लंबे समय तक रोशनी बनाए रखने वाला ऊर्जा स्रोत मिल गया है।
यहाँ अंतर केंद्र में लंबे समय तक चलने वाले हाइड्रोजन संलयन के चरण का है। इससे पहले हाइड्रोजन के एक अन्य रूप, ड्यूटीरियम, से जुड़ी नाभिकीय प्रतिक्रियाएँ हो सकती हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि युवा खगोलीय पिंडों में कोई नाभिकीय प्रतिक्रिया होती ही नहीं है।
अगर कोई पिंड पर्याप्त द्रव्यमान इकट्ठा नहीं कर पाता, तो वह केंद्र में हाइड्रोजन का संलयन लंबे समय तक बनाए रखने में असमर्थ हो सकता है। भूरे बौने ऐसे ही पिंड हैं। इस सीमा का द्रव्यमान पदार्थ की संरचना जैसी स्थितियों पर भी निर्भर करता है। इकट्ठा हुए पदार्थ की मात्रा तारे की उम्र और उसके अंत को भी प्रभावित करती है।
अवरक्त प्रकाश से धूल में छिपे जन्म की पड़ताल होती है
प्रोटोस्टार चमक रहा हो, फिर भी घनी धूल हमारी आँखों को दिखाई देने वाले प्रकाश को रोक सकती है। खगोलविद भीतर के पिंड और उसके आसपास के पदार्थ का अध्ययन करने के लिए अवरक्त प्रकाश और रेडियो तरंगों जैसी अदृश्य तरंगदैर्घ्यों का उपयोग करते हैं। अलग-अलग तरंगदैर्घ्य पदार्थ की अलग संरचनाओं और गुणों को सामने लाते हैं।
जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन ने L1527 नाम के बादल में मौजूद प्रोटोस्टार के आसपास का क्षेत्र अवरक्त प्रकाश में देखा। किनारे से दिखाई देने वाली डिस्क एक गहरी पट्टी जैसी दिखती है। उसके ऊपर और नीचे निकलता प्रकाश आसपास के खाली स्थान को रोशन करता है। इससे प्रोटोस्टार के आसपास पदार्थ का फैलाव समझ में आता है। प्रकाशित तस्वीर के रंग अवरक्त आँकड़ों को हमारी आँखों से दिखाई देने वाले रंगों में दिखाते हैं।
खगोलविद अलग-अलग चरणों में मौजूद पिंडों को देखते हैं और उनकी तुलना भौतिक नियमों पर आधारित मॉडलों से करके तारों के जन्म का क्रम समझते हैं। किसी अवलोकन की तस्वीर एक खास पल दिखाती है। समझाने वाला मॉडल कई अवलोकनों को जोड़कर पूरी प्रक्रिया का खाका देता है, लेकिन हर वास्तविक तारा एक ही समय-सारणी के अनुसार नहीं बनता।
बची हुई सामग्री से ग्रहों की प्रणाली बन सकती है
युवा तारे की डिस्क में ठोस कण जुड़कर बड़े पिंड बनाते हैं। इनमें से कुछ ग्रहों और छोटे खगोलीय पिंडों की सामग्री बन सकते हैं। ALMA के रेडियो अवलोकनों में युवा तारे HL Tau की डिस्क में चमकीले और गहरे छल्ले दिखते हैं। ये संरचनाएँ ग्रहों के बनने के संकेत देती हैं, लेकिन इनका मतलब यह नहीं है कि हर छल्ले में एक ग्रह की पुष्टि हो गई है।
सौर मंडल भी युवा सूर्य के आसपास की गैस और धूल से बना था। धूमकेतु जैसे छोटे पिंडों का अध्ययन शुरुआती सामग्री की संरचना समझने में मदद करता है। उसमें शुरुआती ब्रह्मांड से आए हाइड्रोजन और हीलियम के साथ पिछली पीढ़ियों के तारों से बची सामग्री भी शामिल है।
सबसे पहले तारे लगभग पूरी तरह हाइड्रोजन और हीलियम से बनी गैस से जन्मे थे। इसलिए उनका वातावरण आज के धूल भरे बादलों से अलग था। इस लेख का चरणों वाला मॉडल आज के ब्रह्मांड में सूर्य के करीब द्रव्यमान वाला तारा बनने का एक सामान्य क्रम दिखाता है। ये तारे अपनी लंबी जिंदगी के अंत में क्या छोड़ जाते हैं, यह जानने के लिए तारों की मृत्यु पढ़ें।
स्रोत
- NASA Science — तारों का जन्म और मुख्य अनुक्रम
- NASA — प्रोटोस्टार में पदार्थ का बढ़ना और ऊर्जा के स्रोत
- Grudić और सहयोगी — तारा निर्माण के मॉडलों में ठंडा होना, पदार्थ का जुड़ना और नाभिकीय प्रतिक्रियाएँ
- Chabrier और सहयोगी — हाइड्रोजन संलयन की द्रव्यमान सीमा पर शोध
- NASA Webb — L1527 प्रोटोस्टार के आसपास का अवलोकन
- NASA Webb — L1527 की अवरक्त तस्वीर में रंगों का निरूपण
- ALMA Partnership और सहयोगी — HL Tau की डिस्क के छल्लों का अवलोकन
- NASA Webb — पहली और बाद की पीढ़ियों के तारों की संरचना