बृहस्पति की पट्टियाँ बनाने वाली हवाएँ बादलों के नीचे कितनी गहराई तक जाती हैं?
बृहस्पति की पट्टियाँ स्थिर बादलों की सुव्यवस्थित कतारों से बनी आकृति नहीं हैं। पूर्व और पश्चिम की ओर विपरीत दिशाओं में बहने वाली तेज हवाएँ चमकीले क्षेत्रों को गहरी पट्टियों से अलग करती हैं। जूनो अंतरिक्ष यान के गुरुत्वाकर्षण माप बताते हैं कि ये हवाएँ दिखाई देने वाले बादलों से लगभग 3,000 किलोमीटर नीचे तक जाती हैं।
तस्वीरों में दिखने वाली पट्टियाँ बृहस्पति के वायुमंडल की सबसे बाहरी बादल-परत हैं। बृहस्पति पर ऐसी कोई ठोस सतह नहीं है जिस पर कोई व्यक्ति खड़ा हो सके, इसलिए शोधकर्ता गहराई नापने के लिए बादलों के ऊपरी भाग को आधार मानते हैं। इस कारण “बादलों से 3,000 किलोमीटर नीचे” का अर्थ यह नहीं है कि पट्टियों का रंग इतनी दूर तक बना रहता है। इसका अर्थ है कि पट्टियाँ बनाने वाली हवाओं की गति उस गहराई तक जारी रहती है।
- लगभग 9 घंटे 56 मिनट बृहस्पति को एक घूर्णन पूरा करने में लगने वाला समय
- लगभग 3,000 किलोमीटर पट्टियाँ बनाने वाली पूर्व-पश्चिमी हवाओं की बादलों के नीचे तक की गहराई
- लगभग 300 किलोमीटर माइक्रोवेव अवलोकनों से अनुमानित विशाल लाल धब्बे की गहराई
- उत्तरी ध्रुव पर 8 · दक्षिणी ध्रुव पर 5 प्रत्येक ध्रुव के केंद्रीय तूफान को घेरने वाले विशाल चक्रवातों की संख्या
तेज घूर्णन लंबी पट्टियाँ कैसे बनाता है?
बृहस्पति सौरमंडल के सभी ग्रहों में सबसे तेजी से घूमता है। भीतर से उठने वाली गर्मी वायुमंडलीय गैसों को ऊपर ले जाती है और ठंडी गैसें फिर नीचे उतरती हैं। तेज घूर्णन का प्रभाव जुड़ने पर उत्तर या दक्षिण की ओर बढ़ रहे प्रवाह पूर्व या पश्चिम की ओर मुड़ जाते हैं। इस तरह विपरीत दिशाओं में बहने वाली जेट धाराएँ पास-पास टिक जाती हैं और लंबी पट्टियाँ बनाती हैं। हालांकि ये जेट धाराएँ पहली बार कैसे बनती हैं और इतने लंबे समय तक कैसे बनी रहती हैं, इसे अभी पूरी तरह नहीं समझा गया है।
जूनो ने केवल बादलों की तस्वीरें नहीं लीं। उसके माइक्रोवेव उपकरण ने बादलों के नीचे अमोनिया और तापमान की जाँच की, जबकि पृथ्वी के साथ भेजे और प्राप्त किए गए रेडियो संकेतों से अंतरिक्ष यान की गति में बेहद छोटे बदलाव मापे गए। गहराई में बहती हवाएँ बृहस्पति के भीतर द्रव्यमान को थोड़ा-सा स्थानांतरित करती हैं और गुरुत्वाकर्षण में अपना संकेत छोड़ती हैं। शोधकर्ताओं ने इस संकेत की गणना करके निष्कर्ष निकाला कि जेट धाराएँ बादलों से लगभग 3,000 किलोमीटर नीचे तक जाती हैं।
विशाल लाल धब्बा कितना गहरा तूफान है?
विशाल लाल धब्बा एक बहुत बड़ा उच्च-दाब वाला तूफान है, जिसे कम से कम 1830 के दशक से देखा जा रहा है। यह लंबे समय से बना हुआ है, लेकिन इसका रूप एक जैसा नहीं रहा। अलग-अलग समय के अवलोकनों की तुलना बताती है कि इसकी चौड़ाई धीरे-धीरे घटी है और इसकी रूपरेखा तथा रंग भी बदलते रहे हैं। विशाल लाल धब्बा बृहस्पति पर स्थिर कोई निशान नहीं, बल्कि आज भी बदलता हुआ मौसम है।
जूनो के माइक्रोवेव उपकरण ने विशाल लाल धब्बे के नीचे तापमान की बनावट का पता लगाया और तूफान की गहराई लगभग 300 किलोमीटर आँकी। अलग निकट उड़ानों में अंतरिक्ष यान ने इस धब्बे से होने वाले गुरुत्वाकर्षण के बेहद छोटे बदलाव भी मापे। इन आँकड़ों का विश्लेषण करने वाले शोधकर्ताओं का निष्कर्ष था कि तूफान से पैदा हुआ द्रव्यमान-वितरण का अंतर बादलों से लगभग 500 किलोमीटर से अधिक गहराई तक नहीं जाता। विशाल लाल धब्बा पृथ्वी के महासागरों से कहीं अधिक गहरा है, लेकिन लगभग 3,000 किलोमीटर नीचे जाने वाली जेट धाराओं से कम गहरा है।
बृहस्पति के ध्रुवों पर बिल्कुल अलग दृश्य मिलता है। उत्तरी ध्रुव पर एक केंद्रीय तूफान को आठ विशाल चक्रवात घेरे हुए हैं, जबकि दक्षिणी ध्रुव पर पाँच चक्रवात ऐसा करते हैं। पृथ्वी से बृहस्पति को किनारे से देखने पर ध्रुवीय क्षेत्र ठीक से दिखाई नहीं देते थे। दोनों ध्रुवों के ऊपर से गुजरने वाले जूनो ने पहली बार इस व्यवस्था की विस्तृत तस्वीरें लीं। ये विशाल तूफान लंबे समय तक आपसी दूरी कैसे बनाए रखते हैं, इस पर अभी शोध जारी है।
बृहस्पति की तस्वीरों में दिखने वाली पट्टियाँ और विशाल लाल धब्बा किसी सतह पर उकेरे हुए निशान नहीं हैं। वे अलग-अलग दिशाओं और गहराइयों में चलते वायुमंडल का एक क्षणिक दृश्य हैं।
ठोस सतह न होने पर बृहस्पति के भीतर का पता कैसे लगाया जाता है?
बृहस्पति के भीतर नीचे जाने पर दबाव और तापमान बढ़ते हैं और हाइड्रोजन के गुण बदल जाते हैं। बाहरी हिस्से में वह गैस की तरह चलता है, लेकिन अधिक गहराई में तरल की तरह बहने लगता है और बिजली प्रवाहित करने वाले धात्विक हाइड्रोजन में बदल जाता है। ऐसी कोई स्पष्ट सतह नहीं है जहाँ गैस समाप्त होकर तरल शुरू होता हो। दिखाई देने वाली बादल-परत से केंद्र तक पदार्थ की अवस्था धीरे-धीरे बदलती रहती है।
जब जूनो बृहस्पति के पास से गुजरता है, तब वह बहुत सटीकता से मापता है कि अंतरिक्ष यान की गति कितनी बढ़ती और घटती है। यदि ग्रह के भीतर द्रव्यमान समान रूप से फैला न हो, तो अंतरिक्ष यान पर बृहस्पति का खिंचाव भी स्थान के अनुसार बहुत थोड़ा बदलता है। इन बदलावों की गणना से शोधकर्ता अनुमान लगाते हैं कि भारी तत्व कहाँ केंद्रित हैं।
माप बताते हैं कि चट्टान और बर्फ बनाने वाले पदार्थ शायद केंद्र में केवल एक छोटी, कठोर गेंद के रूप में जमा नहीं हैं। कुछ भारी तत्व आसपास के हाइड्रोजन में काफी दूर तक मिले हो सकते हैं, जिससे कोर और बाहरी परतों की सीमा धुंधली हो जाती है। शोधकर्ता इसे “विरल कोर” या “धुंधला कोर” कहते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बृहस्पति का कोई कोर नहीं है; इसका अर्थ है कि उसका केंद्रीय क्षेत्र पाठ्यपुस्तकों में दिखाई जाने वाली सरल परतों से अधिक जटिल है।
बृहस्पति की आंतरिक संरचना कोई सीधे खींची गई अनुप्रस्थ तस्वीर नहीं है। इसका अनुमान ऐसे मॉडलों से लगाया जाता है जिन्हें गुरुत्वीय क्षेत्र, चुंबकीय क्षेत्र और वायुमंडलीय संरचना—तीनों से मेल खाना चाहिए। इसलिए कोर के आकार और भारी तत्वों के वितरण की एक से अधिक व्याख्याएँ अभी भी संभव हैं।
बृहस्पति के चुंबकीय क्षेत्र ने जूनो की उड़ान का तरीका कैसे बदला?
बृहस्पति की गहराई में मौजूद धात्विक हाइड्रोजन बिजली प्रवाहित करता है। ग्रह के तेज घूर्णन के साथ जब यह पदार्थ चलता है, तो वह एक विशाल जनरेटर की तरह विद्युत धाराएँ और चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। जूनो के माप बताते हैं कि बृहस्पति का चुंबकीय क्षेत्र किसी साधारण छड़ चुंबक जैसा नहीं है; अलग-अलग क्षेत्रों में उसकी शक्ति और दिशा बहुत बदलती है।
यह शक्तिशाली क्षेत्र आवेशित कणों को फँसाकर बृहस्पति के चारों ओर खतरनाक विकिरण पट्टियाँ बनाता है। उनमें अधिक समय बिताने से बचने के लिए जूनो एक लंबी अंडाकार कक्षा में चलता है: वह ग्रह से बहुत दूर जाता है और फिर उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव के ऊपर से थोड़े समय के लिए पास आता है। उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मोटी टाइटेनियम तिजोरी के भीतर सुरक्षित हैं। इस विशेष मार्ग के कारण जूनो ध्रुवीय तूफानों को देख सका और उन्हीं निकट उड़ानों में गुरुत्वाकर्षण तथा चुंबकीय क्षेत्र दोनों को माप सका।
बृहस्पति की तस्वीरें वास्तव में क्या दिखाती हैं?
बृहस्पति की तस्वीर में चमकीले क्षेत्र और गहरी पट्टियाँ देखकर यदि हम उन्हें ठोस सतह के रंग मान लें, तो ग्रह की गति को समझना कठिन हो जाता है। पट्टियों की सीमाओं के दोनों ओर हवाएँ विपरीत दिशाओं में बहती हैं और विशाल लाल धब्बे का आकार तथा रूप समय के साथ बदलता है। हर तस्वीर में बादलों का अलग दिखना इस बात का प्रमाण है कि बृहस्पति लगातार बदलता हुआ वायुमंडलीय संसार है।
बादलों के नीचे सीधे रोशनी डालने वाले कैमरे के बजाय जूनो ने तीन अलग संकेत जुटाए: माइक्रोवेव, गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय क्षेत्र। इनसे पता चला कि पट्टियाँ बनाने वाली हवाएँ हजारों किलोमीटर गहराई तक जाती हैं, विशाल लाल धब्बा उनसे कम गहरा है और भारी तत्व केंद्रीय क्षेत्र में दूर-दूर तक मिले हो सकते हैं। बृहस्पति के बाहरी रूप को सही ढंग से पढ़ना, उसके उस भीतर को समझने का भी तरीका है जिसे हम देख नहीं सकते।
स्रोत
- NASA Science — Jupiter Facts
- NASA Science — Juno Mission
- NASA Science — Juno Probes the Great Red Spot
- Nature — Jupiter’s Atmospheric Jet Streams Extend Thousands of Kilometres Deep
- Science — Microwave Observations of Jupiter’s Atmospheric Vortices
- Science — The Depth of Jupiter’s Great Red Spot
- Nature — Clusters of Cyclones Encircling Jupiter’s Poles
