किन प्रमाणों से पता चलता है कि यूरोपा की बर्फ के नीचे महासागर है?
किसी अंतरिक्ष यान ने यूरोपा की बर्फ को भेदकर उसके महासागर की सीधी तस्वीर नहीं ली है। इसके बजाय तीन अवलोकन एक ही निष्कर्ष की ओर इशारा करते हैं: कम प्रभाव-गड्ढों वाली दरारदार सतह, बृहस्पति के चुंबकीय क्षेत्र के साथ बदलने वाला यूरोपा के पास का दूसरा चुंबकीय क्षेत्र, और बृहस्पति के गुरुत्व से बार-बार मुड़ता पूरा उपग्रह। इनमें सबसे मजबूत प्रमाण चुंबकीय माप है, जो भीतर बिजली प्रवाहित करने वाले खारे तरल की मौजूदगी दिखाता है।
यूरोपा बृहस्पति का एक उपग्रह है और पृथ्वी के चंद्रमा से थोड़ा छोटा है। उसका बाहरी भाग पानी की बर्फ से ढका है, लेकिन सभी अवलोकनों को एक साथ समझाने के लिए उस बर्फ के नीचे पूरे उपग्रह को घेरे महासागर की जरूरत पड़ती है। वैज्ञानिक उसकी गहराई लगभग 60–150 किमी मानते हैं। यह सीधे मापा गया मान नहीं, बल्कि सतही भू-आकृतियों, चुंबकीय क्षेत्र और आंतरिक ऊष्मा को एक साथ समझाने वाले मॉडलों से निकली सीमा है।
- लगभग 3,100 किमी व्यास पृथ्वी के चंद्रमा से थोड़ा छोटे यूरोपा का आकार
- लगभग 3.55 दिन बृहस्पति की एक परिक्रमा पूरी करने में यूरोपा को लगने वाला समय
- पृथ्वी के महासागरों के पानी से दोगुने से अधिक आंतरिक मॉडलों से अनुमानित यूरोपा का कुल पानी
- 49 निकट उड़ानें Europa Clipper की यूरोपा के पास से गुजरने की योजना
दरारों वाली बर्फीली सतह हमें क्या बताती है?
जो सतह बहुत लंबे समय से लगभग नहीं बदली हो, उस पर उल्कापिंडों की टक्कर से बने बहुत से गड्ढे बचने चाहिए। लेकिन यूरोपा पर बड़े प्रभाव-गड्ढे कम हैं। उनकी जगह हजारों किलोमीटर लंबी दरारें और साथ-साथ उठी दोहरी धारियाँ सतह को पार करती हैं। कुछ इलाकों में बर्फ के विशाल टुकड़े ऐसे दिखते हैं मानो वे टूटे, घूमे और फिर नई जगह पर जम गए हों।
ये आकृतियाँ बताती हैं कि यूरोपा का बर्फीला खोल एक बार जमने के बाद स्थिर नहीं रहा। अपेक्षाकृत गर्म बर्फ या तरल दरारों से ऊपर आया होगा और उसने पुरानी सतह को ढका या धकेला होगा। फिर भी तस्वीरों से यह तय नहीं होता कि वह तरल उथली जेबों से आया था या गहरे महासागर से जुड़ा था। सतही भू-आकृतियाँ महासागर पर संदेह करने का पहला संकेत थीं, अपने आप में उसे सिद्ध करने वाली तस्वीर नहीं।
चुंबकीय क्षेत्र से अदृश्य महासागर कैसे खोजा जाता है?
यूरोपा की कक्षा के पास बृहस्पति के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और तीव्रता नियमित रूप से बदलती है। Galileo अंतरिक्ष यान ने मापा कि यूरोपा के पास का चुंबकीय क्षेत्र भी उसी लय में बदलता है। इसका अर्थ है कि यूरोपा के भीतर बिजली प्रवाहित करने वाला पदार्थ है और उसमें बहने वाली विद्युत धारा एक नया चुंबकीय क्षेत्र बनाती है।
शुद्ध बर्फ और चट्टान बिजली को अच्छी तरह नहीं चलाते, लेकिन घुले हुए नमक वाला पानी चलाता है। इसलिए मापों को सबसे अच्छी तरह समझाने वाला मॉडल बर्फ के नीचे दूर तक फैला खारा महासागर रखता है। बाहरी चुंबकीय क्षेत्र के बदलाव से किसी पिंड के भीतर बनने वाले क्षेत्र को “प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र” कहते हैं।
चुंबकीय माप भी हर उत्तर नहीं देते। अलग गहराई, मोटाई और नमक की मात्रा वाले महासागर मिलते-जुलते संकेत बना सकते हैं। बर्फीले खोल की सही मोटाई जानने के लिए रडार और गुरुत्व मापों को भी साथ लेना होगा।
यूरोपा का महासागर पानी की सीधी तस्वीर में नहीं मिला। दरारदार बर्फ और बार-बार बदलते चुंबकीय क्षेत्र ने जब एक ही जगह की ओर संकेत किया, तब महासागर सबसे विश्वसनीय व्याख्या बना।
कम धूप वाली जगह पर पानी तरल कैसे रह सकता है?
यूरोपा की कक्षा पूरी तरह गोल नहीं है। आइओ और गैनीमीड के नियमित गुरुत्वीय खिंचाव उसे थोड़ा दीर्घवृत्ताकार बनाए रखते हैं, इसलिए यूरोपा कभी बृहस्पति के थोड़ा पास आता है और फिर दूर जाता है। दूरी के साथ बृहस्पति का खिंचाव बदलता है और पूरा उपग्रह बार-बार फैलता और सिकुड़ता है। बर्फ और अंदरूनी पदार्थ के लगातार मुड़ने से पैदा घर्षण-ऊष्मा महासागर को पूरी तरह जमने से रोक सकती है।
यदि महासागर की तली पर पानी चट्टान से मिलता हो, तो उनकी प्रतिक्रिया जीवन के उपयोग लायक रासायनिक ऊर्जा बना सकती है। लेकिन यूरोपा के समुद्र तल को कभी सीधे नहीं देखा गया और वहाँ न गर्म पानी उगलने वाले जलतापीय स्रोत मिले हैं, न जीवन। तरल पानी और उपयोगी ऊर्जा की संभावना यह जाँचने का आधार है कि वातावरण जीवन को सहारा दे सकता है या नहीं; यह जीवन की मौजूदगी का प्रमाण नहीं है।
Hubble अंतरिक्ष दूरबीन ने कुछ अवलोकनों में यूरोपा के ऊपर उठती जलवाष्प जैसे संकेत पाए, लेकिन दूसरे अवलोकनों में वही घटना नहीं मिली। इसलिए संभावित जलवाष्प फुहारों को हमेशा फूटते रहने वाले फव्वारों की तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए।
Europa Clipper क्या पता लगाने की कोशिश करेगा?
Europa Clipper अक्टूबर 2024 में पृथ्वी से रवाना हुआ और मार्च 2025 में मंगल के पास से गुजरकर अपनी गति और दिशा बदली। योजना के अनुसार वह दिसंबर 2026 में एक बार फिर पृथ्वी के पास से गुजरेगा और अप्रैल 2030 में बृहस्पति पहुँचेगा। यूरोपा की लगातार परिक्रमा करने के बजाय यान बृहस्पति की कक्षा में रहते हुए यूरोपा के पास से 49 बार गुजरेगा। इससे बृहस्पति के तीव्र विकिरण में बिताया समय घटेगा और अलग-अलग क्षेत्रों को बार-बार मापा जा सकेगा।
बर्फ के भीतर देखने वाला रडार बर्फीले खोल की परतें और पानी की जेबें खोजेगा, जबकि चुंबकमापी महासागर से बने चुंबकीय संकेत को अधिक सटीकता से मापेगा। यान की गति से मापा गया गुरुत्व बताएगा कि यूरोपा कितना मुड़ता है। कैमरे और स्पेक्ट्रोमीटर भू-आकृतियों तथा सतही पदार्थों को साथ देखेंगे। अलग उपकरण एक ही आंतरिक संरचना की ओर इशारा करते हैं या नहीं, यह तुलना करके महासागर की गहराई और बर्फ की मोटाई का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा।
Europa Clipper का लक्ष्य सीधे जीवन खोजना नहीं है। वह जाँचेगा कि तरल पानी है या नहीं, पानी और चट्टान के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान हो सकता है या नहीं, और जीवन के उपयोग योग्य रसायन तथा ऊर्जा उपलब्ध हैं या नहीं। यानी यह मिशन तय करेगा कि यूरोपा पर जीवन को सहारा देने वाला वातावरण हो सकता है या नहीं।
यूरोपा पर महासागर होने का निष्कर्ष कितना पक्का है?
कम प्रभाव-गड्ढों और लगातार बदलाव के निशानों वाली सतह अकेले पूरे उपग्रह को घेरे महासागर की पुष्टि नहीं कर सकती। केवल चुंबकीय क्षेत्र से भी महासागर की सही गहराई और नमक की मात्रा को अलग-अलग तय नहीं किया जा सकता। फिर भी सतही भू-आकृतियाँ, प्रेरित चुंबकीय क्षेत्र और बार-बार होने वाला ज्वारीय तापन एक-दूसरे का विरोध नहीं करते और एक ही महासागर मॉडल से समझाए जा सकते हैं। यही मेल मजबूत प्रमाण बनता है।
यूरोपा की तस्वीरों में लंबी रेखाओं और टूटे बर्फीले टुकड़ों को केवल सतही नमूना मानने की जरूरत नहीं है। वे चलते रहे बर्फीले खोल का रिकॉर्ड हैं, जबकि Galileo का मापा चुंबकीय क्षेत्र नीचे बिजली प्रवाहित करने वाले तरल की ओर संकेत करता है। Europa Clipper एक ही क्षेत्र में इन दोनों संकेतों को विस्तार से मापेगा और अभी मुख्यतः मॉडलों से ज्ञात महासागर की तस्वीर को अधिक स्पष्ट बनाएगा।
स्रोत
- NASA Science — Europa Facts
- NASA Science — Evidence for an Ocean
- NASA Science — Galileo Magnetic Evidence
- Science — Galileo Magnetometer Measurements
- NASA Science — Europa Clipper
- NASA Science — Europa Clipper Mission Timeline
- NASA — Europa Clipper Mission Science
- NASA Science — Hubble Possible Water Vapor Plumes
