“पृथ्वी जैसा” होने का असल मतलब क्या है?
दूर के किसी बहिर्ग्रह की सतह को बारीकी से देख पाना लगभग असंभव है। इसके बजाय खगोलविद मापते हैं कि ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरते समय कितनी रोशनी रोकता है और अपने गुरुत्व से तारे को कितना हिलाता है। इन मापों से ग्रह का आकार और द्रव्यमान पता चलता है, फिर उसकी एक-एक विशेषता की तुलना पृथ्वी से की जा सकती है।
“पृथ्वी जैसा” कई अलग बातों के लिए कहा जा सकता है—आकार, द्रव्यमान, मिलने वाली तारकीय रोशनी या वायुमंडल। कोई ग्रह आकार में पृथ्वी के बराबर होकर भी सतह पर बिल्कुल अलग हो सकता है। रहने योग्य क्षेत्र में होना भी पानी या जीवन की मौजूदगी का प्रमाण नहीं है। ग्रह पृथ्वी से कहां मिलता है और कहां अलग है, यह जानने के लिए हर विशेषता को अलग-अलग मापना पड़ता है।
तारे की रोशनी में कमी से ग्रह का आकार पता चलता है
जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है, तो वह तारे की कुछ रोशनी रोक देता है। समय के साथ तारे की चमक दर्ज करने पर बीच में गिरावट वाली प्रकाश-वक्र रेखा बनती है। इसे पारगमन अवलोकन कहते हैं। यदि यह गिरावट नियमित अंतराल पर दोहराती है, तो ग्रह की परिक्रमा अवधि भी पता चलती है।
गिरावट की गहराई से ग्रह और तारे के आकार का अनुपात मिलता है। बड़ा ग्रह अधिक रोशनी रोकता है, इसलिए गिरावट भी अधिक होती है। लेकिन केवल पारगमन से ग्रह का वास्तविक आकार नहीं मिलता। ग्रह की त्रिज्या निकालने के लिए तारे की त्रिज्या भी जाननी होती है।
पृथ्वी से देखने पर हर ग्रह अपने तारे के सामने से नहीं गुजरता। पारगमन विधि केवल उन्हीं ग्रहों को खोज सकती है जिनकी कक्षा ऐसी दिशा में हो कि वे तारे की रोशनी रोकें। इसलिए इस विधि से मिले ग्रह सभी ग्रहों का पूरा प्रतिनिधित्व नहीं करते।
तारे के डोलने से ग्रह का द्रव्यमान पता चलता है
ग्रह अपने तारे को भी हल्के गुरुत्व बल से खींचता है। तारा हमारी ओर आता है तो उसके वर्णक्रम की अवशोषण रेखाएं थोड़ी नीले सिरे की ओर खिसकती हैं; दूर जाता है तो लाल सिरे की ओर। इसे रेडियल वेग अवलोकन कहते हैं। बार-बार होने वाला यह बदलाव बताता है कि ग्रह तारे को कितनी मजबूती से खींच रहा है।
डोलने की मात्रा ग्रह के द्रव्यमान और उसकी कक्षा के झुकाव, दोनों पर निर्भर करती है। जो ग्रह पारगमन नहीं करता, उसकी कक्षा का झुकाव ठीक-ठीक पता नहीं चलता, इसलिए खगोलविद आम तौर पर उसका “न्यूनतम द्रव्यमान” निकालते हैं। तारकीय धब्बे और ज्वालाएं भी रोशनी के ढंग को बदल सकती हैं, इसलिए तारे की गतिविधि को ग्रह के संकेत से अलग करना पड़ता है।
त्रिज्या और द्रव्यमान से औसत घनत्व मिलता है
पारगमन से मिली त्रिज्या को रेडियल वेग से मिले द्रव्यमान के साथ जोड़ा जा सकता है। पड़ोसी ग्रहों के खिंचाव से पारगमन के समय में आए बदलाव से भी द्रव्यमान मिल सकता है। दोनों को मिलाने पर ग्रह का औसत घनत्व निकलता है। इससे पहला संकेत मिलता है कि ग्रह मुख्यतः ठोस पदार्थ का है या उस पर हल्की गैस की मोटी परत है।
फिर भी अलग-अलग भीतरी बनावट का औसत घनत्व एक जैसा हो सकता है। कम लोहे वाला पथरीला ग्रह और पानी या दूसरे हल्के पदार्थों से भरपूर ग्रह समान घनत्व दिखा सकते हैं। वहां महासागर या महाद्वीप हैं या उसके केंद्र का आकार कितना है, यह जानने के लिए दूसरे अवलोकन और मॉडल चाहिए।
रहने योग्य क्षेत्र तारकीय रोशनी और वायुमंडलीय मॉडल से तय होता है
रहने योग्य क्षेत्र तारे के आसपास वह इलाका है जहां उचित वायुमंडल होने पर किसी ग्रह की सतह पर तरल पानी रह सकता है। इसे जलवायु मॉडल में तारे की ऊर्जा, ग्रह की कक्षा और वायुमंडल के ग्रीनहाउस प्रभाव को रखकर निकाला जाता है। तारा गर्म और चमकीला है या ठंडा और मंद, इसके साथ यह क्षेत्र बदलता है।
किसी ग्रह का इस क्षेत्र में होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि वहां पानी, वायुमंडल या जीवन मिला है। समान मात्रा में तारकीय रोशनी पाने वाले दो ग्रहों की सतहें भी अलग हो सकती हैं, क्योंकि उनके वायुमंडल की मोटाई और बनावट अलग होती है। वायुमंडल, तारे की ज्वालाओं और पानी की मौजूदगी को अलग-अलग जांचना पड़ता है।
पारगमन वर्णक्रम वायुमंडल की जांच करता है
ग्रह जब तारे के सामने से गुजरता है, तो कुछ तारकीय रोशनी उसके वायुमंडल से होकर आती है। वायुमंडल के पदार्थ कुछ तरंगदैर्घ्यों को अधिक सोखते हैं, इसलिए उन तरंगदैर्घ्यों पर ग्रह थोड़ा बड़ा दिखाई देता है। खगोलविद अलग-अलग तरंगदैर्घ्यों पर पारगमन की गहराई को जोड़कर पारगमन वर्णक्रम बनाते हैं और उसकी तुलना विभिन्न वायुमंडलीय मॉडलों से करते हैं।
हर माप में अनिश्चितता की सीमा होती है और एक ही आंकड़े से कई वायुमंडलीय मॉडल मेल खा सकते हैं। ग्रह जिस हिस्से के सामने से गुजरता है, वहां तारकीय धब्बे या चमकीले क्षेत्र भी हर तरंगदैर्घ्य पर पारगमन की गहराई बदल सकते हैं। इसलिए वर्णक्रम का छोटा-सा मोड़ किसी खास अणु—या जीवन—की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं है।
TRAPPIST-1 e और Proxima Centauri b के अवलोकन क्या बताते हैं
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TRAPPIST-1 e
TRAPPIST-1 e अपने तारे के सामने से गुजरता है। इसकी त्रिज्या पृथ्वी की लगभग 0.92 गुना है। पड़ोसी ग्रहों के आपसी खिंचाव से पारगमन के समय में आए बदलाव के आधार पर इसका द्रव्यमान मापा गया। इसका औसत घनत्व पथरीले ग्रह के अनुकूल है, लेकिन आंकड़े केवल एक भीतरी संरचना तय नहीं करते।
2025 में प्रकाशित जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन के अवलोकन हाइड्रोजन-प्रधान मोटे वायुमंडल से मेल नहीं खाते। लेकिन वे अभी भी बिना वायुमंडल वाली स्थिति और नाइट्रोजन-समृद्ध वायुमंडल समेत कई दूसरी संभावनाओं में अंतर नहीं कर सकते। अभी अवलोकन केवल कुछ मॉडलों को खारिज करते हैं, एक अंतिम उत्तर नहीं देते।
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Proxima Centauri b
Proxima Centauri b सूर्य के सबसे नजदीकी तारे की परिक्रमा लगभग हर 11.2 दिन में करता है। रेडियल वेग मापों से इसका न्यूनतम द्रव्यमान पृथ्वी का करीब 1.07 गुना मिलता है। गणना के अनुसार इसे पृथ्वी को सूर्य से मिलने वाली रोशनी की लगभग 0.64 गुना रोशनी मिलती है।
इस ग्रह के किसी पारगमन की पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसकी वास्तविक त्रिज्या और औसत घनत्व अज्ञात हैं। रहने योग्य क्षेत्र में इसकी गणना की गई स्थिति अकेले सतह के पानी या वायुमंडल के बारे में कुछ नहीं बताती। इसके सक्रिय लाल बौने तारे की ज्वालाएं ग्रह के वातावरण को कैसे प्रभावित करती हैं, यह भी जांचना होगा।
सबसे आसानी से दिखने वाले ग्रह पहले मिलते हैं
पारगमन विधि उन बड़े ग्रहों के पक्ष में है जो अधिक तारकीय रोशनी रोकते हैं और उन नजदीकी ग्रहों के भी, जो बार-बार तारे के सामने आते हैं। रेडियल वेग विधि भारी, छोटी परिक्रमा अवधि वाले ग्रहों के प्रति अधिक संवेदनशील है क्योंकि वे अपने तारों को ज्यादा खींचते हैं। दूर की कक्षाओं में छोटे ग्रह कमजोर संकेत देते हैं और उनकी पुष्टि में अधिक समय लगता है।
इसी कारण आज की ग्रह-सूचियों में आसानी से देखी जा सकने वाली दुनियाओं का हिस्सा अधिक है। ग्रह वास्तव में कितने आम हैं, इसका अनुमान लगाने के लिए खगोलविदों को खोजे जाने की संभावना और सर्वेक्षणों से छूट गए ग्रहों—दोनों का हिसाब रखना पड़ता है।
ग्रह की त्रिज्या, द्रव्यमान, मिलने वाली तारकीय रोशनी और वायुमंडल अलग-अलग अवलोकनों से पता चलते हैं। अधिक आंकड़े संभावनाओं को कम कर सकते हैं, लेकिन बिना देखी सतह या जीवन के बारे में दावा सही नहीं ठहरा सकते।
स्रोत
- NASA Science — बहिर्ग्रह कैसे खोजे और समझे जाते हैं
- NASA Science — रहने योग्य क्षेत्र का अर्थ और सीमाएं
- ESA CHEOPS — त्रिज्या, द्रव्यमान और औसत घनत्व का संबंध
- ESA Ariel — पारगमन वर्णक्रम से वायुमंडल का अध्ययन
- NASA Exoplanet Archive — TRAPPIST-1 e के मौजूदा मापदंड
- Agol et al. — TRAPPIST-1 ग्रहों का पारगमन समय, द्रव्यमान और त्रिज्या
- Espinoza et al. — TRAPPIST-1 e का JWST पारगमन वर्णक्रम
- Glidden et al. — TRAPPIST-1 e के वायुमंडलीय मॉडलों पर मौजूदा सीमाएं
- NASA Exoplanet Archive — Proxima Centauri b के मौजूदा मापदंड
- Faria et al. — Proxima Centauri के सटीक रेडियल वेग अवलोकन
- Kipping और Sandford — पारगमन सर्वेक्षणों में चयन पक्षपात
- Rackham et al. — तारकीय सतहों का पारगमन वर्णक्रम पर प्रभाव