TRAPPIST-1 e पर कैसा वायुमंडल हो सकता है?
TRAPPIST-1 e एक चट्टानी ग्रह है। यह पृथ्वी से लगभग 8% छोटा और 31% कम भारी है। इसे पृथ्वी को सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा का करीब 65% मिलता है और यह रहने योग्य क्षेत्र में है, लेकिन यहाँ पानी या वायुमंडल की पुष्टि नहीं हुई है। वेब ने तारे के सामने इसके चार पारगमन देखे और पाया कि मुख्यतः हाइड्रोजन से बना घना वायुमंडल बहुत असंभावित है। फिर भी यह तय नहीं हुआ कि यहाँ नाइट्रोजन, ऑक्सीजन या कार्बन डाइऑक्साइड जैसी भारी गैसों का वायुमंडल है या बिल्कुल वायुमंडल नहीं है। तारकीय धब्बे और ज्वालाएँ तारकीय रोशनी को लगातार बदलते रहते हैं।
- लगभग 6.10 दिन तारे का एक चक्कर पूरा करने का समय
- पृथ्वी का लगभग 0.92 गुना पारगमन में ढकी तारकीय रोशनी से निकाली गई त्रिज्या
- पृथ्वी का लगभग 0.69 गुना पड़ोसी ग्रहों के गुरुत्व प्रभाव से निकाला गया द्रव्यमान
- पृथ्वी का लगभग 0.65 गुना ग्रह को मिलने वाली तारकीय रोशनी
हाइड्रोजन से भरपूर वायुमंडल को कैसे पहचानते हैं?
जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है, तब कुछ तारकीय रोशनी ग्रह के किनारे के वायुमंडल से होकर आती है। गैसें खास तरह की रोशनी सोखती हैं। इसलिए अलग-अलग तरंगदैर्ध्यों पर रोकी गई मात्रा मापकर उनके निशान खोजे जा सकते हैं। हाइड्रोजन जैसी हल्की गैस बहुत ऊँचाई तक फैलती है और बड़ा निशान बनाती है। नाइट्रोजन या कार्बन डाइऑक्साइड जैसी भारी गैसें नीचे रहती हैं और उनके निशान बहुत छोटे होते हैं।
वेब के NIRSpec उपकरण ने 2023 के चार पारगमन में दृश्य रोशनी के लाल सिरे से निकट-अवरक्त तक का अध्ययन किया। बादल और कम दबाव की संभावना जोड़ने पर भी लगभग 80% से अधिक हाइड्रोजन वाला वायुमंडल आँकड़ों से मेल नहीं खाता था। इसका अर्थ है कि ग्रह बनने के समय मिला हाइड्रोजन और हीलियम का वायुमंडल आज तक बचा होने की संभावना कम है। इससे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन या कार्बन डाइऑक्साइड से भरपूर वायुमंडल नहीं नकारे जाते।
हर अवलोकन में नतीजे अलग क्यों रहे?
TRAPPIST-1 की सतह हर जगह एक जैसी चमकती नहीं है। आसपास से गहरे धब्बे, चमकीले क्षेत्र और थोड़ी देर के विस्फोट समय के साथ जगह और तीव्रता बदलते हैं। ग्रह जिस हिस्से को नहीं ढकता, उसका रंग बदल जाए तो बिना वायुमंडल के भी अलग-अलग तरंगदैर्ध्यों पर रोकी गई रोशनी बदल सकती है। यह वायुमंडलीय संकेत जैसा दिखता है।
चारों अवलोकन तारे की सतह से प्रभावित हुए और तीसरे पारगमन के दौरान एक बड़ी ज्वाला उठी। शोधकर्ताओं ने हर अवलोकन में अलग रहे चौड़े बदलावों को तारे का प्रभाव माना। फिर उन्हीं तरंगदैर्ध्यों पर हर बार दोहरने वाले छोटे निशानों को ग्रह के वायुमंडल का संभावित संकेत मानकर जाँचा। लेकिन धब्बों के तापमान और आकार के सरल अनुमान तारकीय रोशनी के सारे बदलाव नहीं समझा सके। इसलिए तारे का प्रभाव हटाने के बाद बचा छोटा निशान तुरंत ग्रह की गैस नहीं कहा जा सकता।
मौजूदा आँकड़े केवल इतना बताते हैं कि हाइड्रोजन का घना वायुमंडल नहीं है। भारी गैसों का पतला वायुमंडल है या बिल्कुल वायुमंडल नहीं, यह अभी मालूम नहीं है।
क्या मीथेन जैसा हल्का संकेत खोज घोषित करने के लिए काफी है?
तारे के बनाए बदलाव हटाने के बाद, नाइट्रोजन जैसी भारी गैसों और थोड़े मीथेन वाला वायुमंडल कुछ निशान समझा सकता था। लेकिन बिना किसी वायुमंडलीय निशान वाला सपाट परिणाम भी अवलोकनों से मेल खाता था और कुछ विश्लेषण तरीकों में बेहतर मेल खाता था। इसलिए अभी दिख रहे छोटे निशान मीथेन या वायुमंडल की खोज घोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
शुक्र या मंगल की तरह अधिकतर कार्बन डाइऑक्साइड वाले वायुमंडल के मॉडल भी आँकड़ों से कम मेल खाते थे। थोड़ी कार्बन डाइऑक्साइड वाला भारी वायुमंडल फिर भी संभव है। यदि तरल पानी मौजूद हो तो इतनी कार्बन डाइऑक्साइड ग्रीनहाउस प्रभाव बना सकती है, पर मौजूदा अवलोकनों ने पानी, महासागर या बादल सीधे नहीं खोजे हैं।
b और e को एक के बाद एक क्यों देखते हैं?
शोधकर्ता 15 अतिरिक्त अवलोकन ऐसे समय कर रहे हैं जब TRAPPIST-1 b, e से ठीक पहले या बाद में तारे के सामने से गुजरता है। b घने वायुमंडल के बिना एक चट्टानी ग्रह लगता है। इसलिए b के आँकड़ों में आए निशान लगभग उसी समय तारे के बनाए माने जा सकते हैं। फिर उन निशानों को e के आँकड़ों से हटाकर केवल e में दोहरने वाले बदलाव खोजे जाते हैं।
2025 में बताए गए पहले तीन अवलोकनों ने इस तरीके की ताकत और सीमा दोनों दिखाईं। तारा शांत था तो उसका प्रभाव घटाया जा सका। लेकिन दोनों पारगमन के बीच तेज ज्वाला उठी तो तारे की स्थिति को एक जैसा नहीं माना जा सका। पूरे आँकड़े मिलने के बाद भी ज्वालाओं से प्रभावित अवलोकन पहचानने और अलग विश्लेषण तरीकों से उत्तर कितना बदलता है, यह जाँचने की जरूरत होगी।
- e को चार बार देखा गया घना हाइड्रोजन प्रधान वायुमंडल नकारा गया, पर तारे के बनाए बड़े बदलाव भी मिले।
- कई वायुमंडलों से तुलना की गई बिना वायुमंडल और भारी गैसों वाले कई वायुमंडल, दोनों संभव रहे।
- b और e को लगातार देखा जा रहा है लगभग उसी समय b में मिले निशानों से तारे का प्रभाव पता चलता है।
- केवल e में बचे निशान खोजे जाते हैं पूरे अवलोकन जोड़कर जाँचा जाएगा कि गैस के वही निशान बार-बार आते हैं या नहीं।
रहने योग्य क्षेत्र में मौजूद e के बारे में क्या पुष्टि हुई है?
e को मिलने वाली तारकीय रोशनी उस सीमा में है जिसमें सतह पर तरल पानी संभव हो सकता है। लेकिन वास्तविक तापमान वायुमंडलीय दबाव और बनावट, बादल, सतह की परावर्तन क्षमता और दिन-रात के बीच गर्मी के आने-जाने पर निर्भर है। यदि एक ही भाग हमेशा तारे की ओर रहता है, तो मॉडल पूरे ग्रह में फैले महासागर और केवल तारे की ओर वाले क्षेत्र में बचे पानी, दोनों की अनुमति देते हैं। इनमें से कोई भी दृश्य देखा नहीं गया है।
पहला प्रश्न जीवन का नहीं, वायुमंडल के होने का है। तारे के बार-बार बनाए बदलाव पहले अलग करने होंगे। उसके बाद केवल e में उन्हीं तरह की किरणों पर निशान कई बार मिलने पर ही बताया जा सकेगा कि कौन-सी गैसें मौजूद हैं।
इस पृष्ठ पर दिखाए गए महासागर, बादल और सतह अवलोकन की तस्वीर नहीं हैं। वेब के मौजूदा अवलोकनों ने घने हाइड्रोजन प्रधान वायुमंडल की संभावना बहुत कम कर दी है। भारी गैसों का वायुमंडल, तरल पानी और जीवन अभी अपुष्ट हैं।
स्रोत
- NASA Exoplanet Archive — TRAPPIST-1 e
- NASA Science — वेब द्वारा TRAPPIST-1 e का अध्ययन
- The Astrophysical Journal Letters — चार NIRSpec पारगमन वर्णक्रम
- The Astrophysical Journal Letters — द्वितीयक वायुमंडल की सीमाएँ
- Allen व अन्य — TRAPPIST-1 e/b कार्यक्रम और शुरुआती अवलोकन
- NASA Science — TRAPPIST-1 प्रणाली पर वेब के परिणाम
- NASA Science — TRAPPIST-1 e सूची