ब्रह्मांड गर्म और सघन अवस्था से फैलता आया है
बिग बैंग सिद्धांत बताता है कि ब्रह्मांड एक बहुत गर्म और सघन शुरुआती अवस्था से फैलते हुए कैसे ठंडा हुआ। आकाशगंगाओं की गति, अंतरिक्ष में आज भी मौजूद विकिरण और हल्के तत्वों की मात्रा इस व्याख्या का समर्थन करते हैं।
मानक ब्रह्मांडीय मॉडल के अनुसार ब्रह्मांड की आयु लगभग 13.8 अरब वर्ष है। शुरुआत में तारे और आकाशगंगाएँ नहीं थे। ठंडा होने पर परमाणु बने। बाद में गुरुत्वाकर्षण ने गैस को इकट्ठा किया और तारे व आकाशगंगाएँ बनीं।
- लगभग 13.8 अरब वर्ष प्रेक्षणों और मानक मॉडल से अनुमानित ब्रह्मांड की आयु
- पहले कुछ मिनट हीलियम और अन्य हल्के नाभिक बनने का समय
- लगभग 3.8 लाख वर्ष बाद परमाणु बने और प्रकाश लंबी दूरी तय कर सका
- तीन मुख्य प्रमाण ब्रह्मांड का विस्तार, माइक्रोवेव पृष्ठभूमि और हल्के तत्वों का अनुपात
आकाशगंगाओं के बीच की दूरियाँ बढ़ रही हैं
दूर की आकाशगंगा के प्रकाश का विश्लेषण करके मापा जाता है कि उसकी तरंगदैर्घ्य कितनी बढ़ी है। इसे लाल विस्थापन कहते हैं। सामान्यतः अधिक दूर की आकाशगंगाओं का लाल विस्थापन अधिक होता है। यह ब्रह्मांड के विस्तार के साथ प्रकाश की तरंगें खिंचने की व्याख्या से मेल खाता है। केवल यह नहीं देखा जाता कि आकाशगंगा कितनी लाल दिखती है।
विस्तार को अतीत की ओर उलटकर देखें तो पदार्थ अधिक सघन और तापमान अधिक था। इस विस्तार का कोई विशेष केंद्र नहीं है। पर्याप्त बड़े पैमाने पर किसी भी आकाशगंगा को आधार मानें, आकाशगंगाओं की औसत दूरियाँ बढ़ती हैं। लेकिन गुरुत्वाकर्षण से बँधे सौर मंडल या किसी आकाशगंगा के अंदर का क्षेत्र इसी तरह नहीं फैलते।
ब्रह्मांड के विस्तार का अर्थ आकाशगंगाओं के बीच की दूरियाँ बढ़ना है।
बिग बैंग को विस्फोट कहना एक जगह से पदार्थ के चारों ओर उड़ने का भ्रम पैदा कर सकता है। सिद्धांत पूरे ब्रह्मांड के विस्तार और तापमान में बदलाव की व्याख्या करता है।
शुरुआती ब्रह्मांड का प्रकाश आज भी देखा जा सकता है
शुरुआती ब्रह्मांड में प्रकाश मुक्त इलेक्ट्रॉनों से बार-बार प्रकीर्णित होता था और दूर नहीं जा पाता था। बिग बैंग के लगभग 3.8 लाख वर्ष बाद तापमान घटने पर इलेक्ट्रॉन नाभिक से जुड़कर परमाणु बनाने लगे। तब से लंबी दूरी तय कर सकने वाला प्रकाश आज ब्रह्मांडीय माइक्रोवेव पृष्ठभूमि (CMB) के रूप में मापा जाता है। विस्तार ने उसकी तरंगदैर्घ्य को बढ़ाकर माइक्रोवेव क्षेत्र में पहुँचा दिया है।
COBE उपग्रह ने इस विकिरण का स्पेक्ट्रम मापा। यह लगभग 2.725 K पर तापीय संतुलन में उत्सर्जित प्रकाश के वितरण से बहुत निकटता से मेल खाता है। WMAP और Planck ने आकाश की अलग-अलग दिशाओं में तापमान के छोटे अंतर भी मापे। इनमें आकाशगंगाएँ बनने से पहले पदार्थ के वितरण की जानकारी है। CMB बिग बैंग के लगभग 3.8 लाख वर्ष बाद का ब्रह्मांड दिखाता है।
- पहले कुछ मिनट: प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जुड़कर हीलियम तथा अन्य हल्के नाभिक बनाते हैं।
- लगभग 3.8 लाख वर्ष बाद: इलेक्ट्रॉन नाभिक से जुड़ते हैं और प्रकाश लंबी दूरी तय करने लगता है।
- अगले कई सौ मिलियन वर्षों में: गुरुत्वाकर्षण गैस को इकट्ठा करता है और पहले तारे व आकाशगंगाएँ बनती हैं।
- लगभग 13.8 अरब वर्ष बाद, आज: फैले हुए ब्रह्मांड में शुरुआती विकिरण को माइक्रोवेव के रूप में मापते हैं।
हीलियम की मात्रा शुरुआती ब्रह्मांड के मॉडल की जाँच करती है
एक अकेला प्रोटॉन ही हाइड्रोजन के सबसे आम रूप का नाभिक है। पहले कुछ मिनटों में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जुड़कर हीलियम तथा अन्य नाभिक बने। इसे बिग बैंग नाभिकीय संश्लेषण कहते हैं। गणना के अनुसार इसके बाद साधारण पदार्थ के द्रव्यमान में लगभग 75% हाइड्रोजन और 25% हीलियम था। तारों द्वारा बहुत कम बदले गए पदार्थ के प्रेक्षण इससे मेल खाते हैं।
ड्यूटेरियम की मात्रा भी गणना की एक महत्वपूर्ण जाँच है। यह हाइड्रोजन है जिसके नाभिक में एक प्रोटॉन और एक न्यूट्रॉन होता है। लेकिन लिथियम-7 की गणना की गई मात्रा पुराने तारों में मापी गई मात्रा से मेल नहीं खाती; इस पर शोध जारी है। कार्बन और ऑक्सीजन जैसे भारी तत्व मुख्यतः बाद के तारों के भीतर नाभिकीय प्रतिक्रियाओं से बने।
ब्रह्मांड की उत्पत्ति अभी अज्ञात है
विस्तार और ठंडा होने के बाद गैस से तारे व आकाशगंगाएँ बनीं। इसी लंबे विकास से आज की मिल्की वे और सौर मंडल बने। बिग बैंग सिद्धांत इस विकास को समझाता है, लेकिन यह स्थापित नहीं करता कि ब्रह्मांड अस्तित्व में क्यों आया।
इन्फ्लेशन परिकल्पना के अनुसार बहुत शुरुआती समय में अत्यंत संक्षिप्त और तेज़ विस्तार हुआ। इससे बड़े पैमाने पर ब्रह्मांड की एकरूपता समझने में मदद मिलती है, लेकिन उस विस्तार का भौतिक कारण पुष्ट नहीं हुआ है। पास के पिंडों से मापी गई विस्तार दर और CMB पर मॉडल लागू करके अनुमानित दर में भी अंतर है। वैज्ञानिक जाँच रहे हैं कि इसका कारण मापन की त्रुटियाँ हैं या सिद्धांत में सुधार की जरूरत है।
विलक्षणता वह बिंदु है जहाँ गणना में घनत्व जैसी राशियाँ अनंत हो जाती हैं और वर्तमान सिद्धांत की सीमाएँ सामने आती हैं। ब्लैक होल की विलक्षणताएँ और बिग बैंग को पीछे की ओर गणना करने पर मिलने वाली विलक्षणताएँ, दोनों वर्तमान सिद्धांतों की सीमाओं की ओर संकेत करती हैं। समीकरण में विलक्षणता आने से यह सिद्ध नहीं होता कि वास्तविक ब्रह्मांड एक अनंत छोटे बिंदु से शुरू हुआ। बिग बैंग से पहले क्या था, इसका भी कोई निश्चित उत्तर नहीं है।
स्रोत
- NASA Science — Universe Overview
- NASA Science — Hubble and the Big Bang
- NASA Science — COBE Science
- NASA Science — Webb Telescope and the Big Bang
- ESA — Planck science highlights
- Planck Collaboration — 2018 cosmological parameters
- Particle Data Group — Big Bang Nucleosynthesis
- NASA — Black Hole Math: limits of singularities