TRAPPIST-1 h की कक्षीय अवधि कैसे पता चली?
TRAPPIST-1 h को पहली बार 2016 में Spitzer अंतरिक्ष दूरबीन के आँकड़ों में अपने तारे के सामने से एक बार गुजरते देखा गया था। एक पारगमन से कक्षीय अवधि पता नहीं चलती। शोधकर्ताओं ने पहले अंदरूनी ग्रहों की कक्षीय अवधियों के आपसी संबंध से छह संभावित अवधियाँ निकालीं। पुराने जमीनी अवलोकनों ने उनमें से पाँच को बाहर कर दिया। इसके बाद K2 ने 79 दिन के अवलोकन में लगभग 18.77 दिन के अंतर पर चार पारगमन पाए और अवधि की पुष्टि की।
- लगभग 18.77 दिन बार-बार हुए पारगमन से पुष्ट कक्षीय अवधि
- 79 दिन K2 द्वारा TRAPPIST-1 के लगातार अवलोकन की अवधि
- 4 बार K2 के आँकड़ों में मिले h के अतिरिक्त पारगमन
- लगभग 173 K लगभग −100°C के बराबर गणना किया गया तापमान
एक पारगमन से क्या पता चल सकता है?
कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है, तो तारों की रोशनी में आई कमी से उसकी त्रिज्या और रोशनी कम रहने के समय से पारगमन की अवधि निकाली जा सकती है। लेकिन अगला पारगमन देखे बिना यह तय नहीं होता कि ग्रह को एक चक्कर लगाने में कितने दिन लगते हैं। अवलोकन न होने के दौरान वह एक, दो या तीन चक्कर लगा चुका हो सकता है।
खोज के शुरुआती अध्ययन ने Spitzer द्वारा देखे गए पारगमन के समय और अवधि से लगभग 20 दिन की कक्षीय अवधि का अनुमान लगाया था। फिर भी संभावित दायरा लगभग 14 से 35 दिन तक बहुत बड़ा था। यह बार-बार हुए पारगमन से मापा गया मान नहीं था, बल्कि तारे और कक्षा का आकार मानकर निकाला गया दायरा था।
संभावित कक्षीय अवधियों को कैसे सीमित किया गया?
TRAPPIST-1 के अंदरूनी छह ग्रह एक-दूसरे के साथ स्थिर संबंध बनाए रखते हुए परिक्रमा करते हैं। समान समय में पड़ोसी ग्रह जितने चक्कर लगाते हैं, उनका अनुपात छोटी पूर्ण संख्याओं के करीब होता है। इस संबंध को अनुनाद कहते हैं। शोधकर्ताओं ने माना कि f, g और h के बीच भी ऐसा ही संबंध है और h की संभावित कक्षीय अवधियों की गणना की।
गणना से 13.941 से 39.026 दिन के बीच छह संभावित मान मिले। शोधकर्ताओं ने Spitzer के अवलोकन से पहले जमीन पर जमा किए गए लगभग 1,000 घंटे के आँकड़ों को दोबारा देखा। यदि पाँच संभावित मानों में से कोई सही होता, तो खास समय पर तारों की रोशनी कम होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 18.766 दिन वाले मान के अनुमानित पारगमन समय का कोई आँकड़ा मौजूद नहीं था, इसलिए केवल वही बचा। उस समय 18.766 दिन सबसे संभावित अनुमान भर था, बार-बार हुए अवलोकन से पुष्ट मान नहीं।
ग्रहों के अनुनाद संबंध ने संभावनाओं को छह अवधियों तक सीमित किया। वास्तविक अवधि की पुष्टि तभी हुई, जब K2 ने समान अंतर पर दोहरते पारगमन देखे।
K2 के अवलोकनों ने किस अवधि की पुष्टि की?
K2 ने दिसंबर 2016 से मार्च 2017 तक 79 दिन TRAPPIST-1 का अवलोकन किया। बीच में दूरबीन सुरक्षित मोड में चली गई, जिससे पाँच दिन के आँकड़े नहीं मिले। दिशा नियंत्रित करने वाले उपकरण की खराबी से हुए कंपन को भी ठीक करना पड़ा। सुधार किए गए चमक के आँकड़ों में 18.766 दिन के अंतर से अनुमानित चारों समय पर ऐसे पारगमन दिखे जिनकी गहराई और आकार Spitzer में दिखे पारगमन जैसे थे।
टीम ने यह भी जाँचा कि परिणाम को अनुमानित समय से जबरन तो नहीं मिलाया गया। आँकड़ों से b से g तक के पहले से ज्ञात पारगमन हटाकर, h की अवधि पहले से तय किए बिना खोजने पर भी लगभग 18.77 दिन का संकेत सबसे मजबूत रहा। एक दूसरी विश्लेषण विधि ने भी वही चार पारगमन खोजे। सांख्यिकीय तुलना में h को शामिल करने वाला सात ग्रहों का मॉडल, h के बिना मॉडल की तुलना में आँकड़ों को कहीं बेहतर समझाता था। Spitzer के पहले और K2 के चार पारगमनों ने मिलकर 18.767 दिन की कक्षीय अवधि की पुष्टि की।
- Spitzer का एक पारगमन इससे h का आकार और पारगमन समय मिला, लेकिन कक्षीय अवधि नहीं।
- अनुनाद की गणना f और g की कक्षीय अवधियों से h के लिए छह संभावित मान निकले।
- जमीनी आँकड़ों की दोबारा जाँच जिन समयों पर पारगमन नहीं हुआ, उनसे पाँच मान बाहर हुए।
- K2 के दोहराए गए अवलोकन लगभग 18.77 दिन के अंतर पर चार पारगमन मिले और अवधि की पुष्टि हुई।
TRAPPIST-1 h के गणना किए गए तापमान का क्या मतलब है?
NASA की सूची के अनुसार h की त्रिज्या पृथ्वी की लगभग 0.755 गुना और द्रव्यमान लगभग 0.326 गुना है। वह सातों ग्रहों में सबसे छोटा और हल्का है तथा अपने तारे से लगभग 92.7 लाख किमी दूर परिक्रमा करता है। 2017 के अध्ययन में दिया गया 173 K का संतुलन तापमान लगभग −100°C है। यह मानकर इसकी गणना की गई कि ग्रह को मिली तारों की रोशनी और उससे निकली गर्मी बराबर हैं। इसे सतह पर थर्मामीटर से नहीं मापा गया।
उसी अध्ययन ने गणना की कि h को प्रति वर्ग मीटर लगभग 200 वाट ऊर्जा मिलती है। नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प वाले वायुमंडलीय मॉडल में यह ऊर्जा सतह पर तरल पानी बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं थी। ठंडे इलाकों में कार्बन डाइऑक्साइड जम भी सकती थी, जिससे वायुमंडल में उसकी मात्रा घटती। लेकिन वास्तविक परावर्तन क्षमता, वायुदाब, बादल और सतही तापमान मापे नहीं गए हैं। इसलिए यह नतीजा खास शर्तों वाले मॉडल पर लागू होता है और h की असली जलवायु की पुष्टि नहीं करता।
Webb तारे के बदलाव और वायुमंडलीय संकेत को कैसे अलग करता है?
NASA के जनवरी 2026 के सारांश के अनुसार Webb ने h का अवलोकन किया है, लेकिन विश्लेषण अभी प्रकाशित नहीं हुआ है। तारे की सतह के काले धब्बे और विस्फोट अलग-अलग तरंगदैर्ध्यों पर उसकी चमक को अलग ढंग से बदलते हैं। ये बदलाव ग्रह के वायुमंडल के संकेत जैसे लग सकते हैं। इसलिए लगभग हर 18.77 दिन पर होने वाले कई पारगमनों में उन्हीं अणुओं के संकेत दोहरते हैं या नहीं, यह जाँचना जरूरी है।
h की कक्षीय अवधि खोजने में गणना और अवलोकन ने अलग-अलग काम किए। अनुनाद ने देखने का समय बताया, पुराने आँकड़ों ने मेल न खाने वाले संभावित मान हटाए और K2 के दोहरते पारगमनों ने अवधि की पुष्टि की। लेकिन उसके वायुमंडल और सतही वातावरण की पुष्टि अभी दोहराए गए अवलोकनों से नहीं हुई है।
इस पृष्ठ पर दिखाई गई बर्फ और बादल समझाने के लिए बनाई गई तस्वीर का हिस्सा हैं, अवलोकन से मिली तस्वीर नहीं। 18.77 दिन की अवधि की पुष्टि दोहरते पारगमनों से हुई है, लेकिन 173 K सरल मान्यताओं से निकाला गया मान है। किसी वायुमंडल, बर्फ, तरल पानी या वास्तविक सतही तापमान की पुष्टि नहीं हुई है।
स्रोत
- NASA Science — TRAPPIST-1 h सूची
- Nature — सात समशीतोष्ण चट्टानी ग्रह
- Nature Astronomy — सात ग्रहों की अनुनाद शृंखला
- The Planetary Science Journal — द्रव्यमान, त्रिज्या, घनत्व और गति
- Astronomy & Astrophysics — जलवायु और वाष्पशील पदार्थों के मॉडल
- NASA Science — Kepler और K2 मिशन
- NASA Science — TRAPPIST-1 प्रणाली पर Webb के नतीजे