TRAPPIST-1 d पर कैसा वायुमंडल बचा हो सकता है?
TRAPPIST-1 d एक छोटा चट्टानी ग्रह है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी का लगभग 39% और आकार लगभग 79% है। वेब ने तारे के सामने इसके दो पारगमन के दौरान कई तरह की तारकीय रोशनी का अध्ययन किया, लेकिन पानी, मीथेन या कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों के साफ निशान नहीं मिले। ये परिणाम हाइड्रोजन से भरपूर घने वायुमंडल और ऐसे कई साफ वायुमंडलों से मेल नहीं खाते, जिनकी गैसों के बड़े निशान दिखने चाहिए थे। फिर भी लगभग वायुमंडल रहित सतह, बहुत पतला वायुमंडल या ऐसा वायुमंडल संभव है जिसकी निचली गैसों को ऊँचे बादल या धुंध छिपा रहे हों।
- लगभग 4.0496 दिन तारे का एक चक्कर पूरा करने का समय
- लगभग 33.4 लाख किमी ग्रह और तारे के बीच औसत दूरी
- पृथ्वी का लगभग 0.39 गुना पारगमन के समय में बदलाव से निकाला गया द्रव्यमान
- पृथ्वी का लगभग 0.79 गुना ढकी हुई तारकीय रोशनी से निकाली गई त्रिज्या
ग्रह द्वारा रोकी गई तारकीय रोशनी में वायुमंडल कैसे खोजते हैं?
जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है, तब ग्रह खुद तारकीय रोशनी रोकता है और कुछ रोशनी उसके किनारे के वायुमंडल से गुजरती है। यदि वायुमंडल की कोई गैस खास तरह की रोशनी सोखती है, तो उस तरंगदैर्ध्य पर वायुमंडल भी अपारदर्शी हो जाता है और ग्रह थोड़ा बड़ा दिखता है। वेब अलग-अलग तरंगदैर्ध्यों पर रोकी गई रोशनी की मात्रा की तुलना करके गैसें खोजता है। इसे पारगमन वर्णक्रम कहा जाता है।
वायुमंडल जितना गर्म, ग्रह का गुरुत्व जितना कमजोर और अणु जितने हल्के हों, गैसों के निशान उतने बड़े दिखते हैं। d का गुरुत्व पृथ्वी से कमजोर है। इसलिए यदि हाइड्रोजन जैसी हल्की गैस का घना वायुमंडल बचा होता, तो अलग-अलग तरंगदैर्ध्यों पर ग्रह का दिखने वाला आकार साफ बदलता। ऐसा बदलाव नहीं मिला, इसलिए हाइड्रोजन प्रधान घने वायुमंडल की संभावना बहुत कम है।
दो पारगमन अवलोकनों में किन गैसों को खोजा गया?
वेब के NIRSpec उपकरण ने दो पारगमन में दृश्य रोशनी के लाल सिरे से लेकर निकट-अवरक्त तक का प्रकाश एक साथ दर्ज किया। शोधकर्ताओं ने यह भी हिसाब लगाया कि TRAPPIST-1 के धब्बे और चमकीले क्षेत्र तारकीय रोशनी को कैसे बदलते हैं। फिर उन्होंने आँकड़ों की तुलना बिना वायुमंडल वाली स्थिति से लेकर अलग दबाव, गैसों और बादलों की ऊँचाई वाले कई वायुमंडलों से की।
पानी, मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, अमोनिया या सल्फर डाइऑक्साइड का कोई साफ निशान नहीं दिखा। इन गैसों की पर्याप्त मात्रा वाले साफ और घने वायुमंडलों से जो बदलाव दिखने चाहिए थे, वे भी नहीं मिले। इसका यह अर्थ नहीं कि पूरे ग्रह पर इनका एक भी अणु नहीं है। इसका अर्थ केवल इतना है कि मौजूदा अवलोकनों में इतना बड़ा निशान नहीं दिखा जिसे पहचाना जा सके।
मौजूदा अवलोकनों में गैसों के साफ निशान नहीं दिखे। बड़े निशान बनाने वाले साफ और घने वायुमंडल नकारे जाते हैं, लेकिन पतले या बादलों से ढके वायुमंडल संभव हैं।
गैस के साफ संकेत न मिलने पर किन वातावरणों की संभावना रहती है?
पहला, लगभग वायुमंडल रहित चट्टानी सतह सपाट वर्णक्रम बनाएगी, क्योंकि पारगमन के समय अतिरिक्त रोशनी सोखने वाली गैस नहीं होगी। दूसरा, मंगल से भी पतला वायुमंडल या भारी अणुओं का वायुमंडल इतना नीचा और सघन हो सकता है कि मौजूदा सटीकता में उसके निशान न मिलें। तीसरा, ऊँचे बादल या धुंध बहुत-से तरंगदैर्ध्यों को ढक सकते हैं और नीचे मौजूद गैसों के आणविक निशान सपाट कर सकते हैं।
इन तीनों स्थितियों में सतही तापमान और दबाव बहुत अलग होंगे, फिर भी पारगमन के समय मापी गई तारकीय रोशनी में ये एक जैसे दिख सकते हैं। छोटे बदलाव साफ करने के लिए और पारगमन जोड़ने होंगे, ग्रह की अवरक्त रोशनी से दिन और रात के बीच गर्मी का आना-जाना मापना होगा और ऐसे दूसरे निशान खोजने होंगे जो बादलों के ऊपर भी दिखें।
- आकार और द्रव्यमान निकाले गए ढकी हुई तारकीय रोशनी से आकार और पड़ोसी ग्रहों के पारगमन समय में बदलाव से द्रव्यमान मिला।
- तारे के बनाए बदलाव का हिसाब लगाया गया धब्बों और चमकीले क्षेत्रों से तारकीय रोशनी का रंग कैसे बदलता है, यह भी जाँचा गया।
- कई वायुमंडलों से तुलना की गई अलग गैसों, दबाव और बादलों की ऊँचाई के लिए रोशनी के संभावित निशान बनाए गए।
- मेल न खाने वाले वायुमंडल हटाए गए हाइड्रोजन से भरपूर या बड़े निशान बनाने वाले साफ और घने वायुमंडल आँकड़ों से मेल नहीं खाते थे।
- तीन संभावनाएँ बचीं लगभग वायुमंडल रहित सतह, बहुत पतला वायुमंडल और ऊँचे बादलों वाला वायुमंडल अभी और जाँचना होगा।
रहने योग्य क्षेत्र के पास होने का वास्तव में क्या मतलब है?
ग्रह d को अपने तारे से पृथ्वी को सूर्य से मिलने जितनी या उससे थोड़ी अधिक ऊर्जा मिलती है। यह व्यापक रूप से तय किए गए रहने योग्य क्षेत्र के तारे की ओर वाले किनारे के पास है। इसका अर्थ केवल यह है कि सही मात्रा में गर्मी रोकने वाला वायुमंडल हो तो इस दूरी पर तरल पानी संभव हो सकता है। यह पानी, हवा, बादल या जीवन मिलने का प्रमाण नहीं है।
वायुमंडल न हो तो दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर होगा और सतह का पानी लंबे समय तक बचना कठिन होगा। पतले वायुमंडल में तरल पानी की स्थिरता उसके दबाव और बनावट पर निर्भर करेगी। घने वायुमंडल और ऊँचे बादलों में ग्रीनहाउस प्रभाव और परावर्तन तापमान को फिर बदल देंगे। मौजूदा अवलोकन इन वातावरणों में से एक नहीं चुन सकते।
इस पृष्ठ पर दिखाई गई सतह और बादल अवलोकन की तस्वीर नहीं हैं। वेब ने यह मापा कि ग्रह के तारे के सामने से गुजरते समय अलग-अलग तरंगदैर्ध्यों पर रोकी गई रोशनी की मात्रा बदलती है या नहीं। गैसों के निशान न मिलने का अर्थ यह नहीं कि ग्रह पर वायुमंडल या जीवन नहीं है।
स्रोत
- NASA Exoplanet Archive — TRAPPIST-1 d
- NASA Science — TRAPPIST-1 d के संभावित वायुमंडल
- The Astrophysical Journal — TRAPPIST-1 d का NIRSpec पारगमन वर्णक्रम
- The Planetary Science Journal — TRAPPIST-1 के द्रव्यमान और त्रिज्याएँ
- NASA Science — TRAPPIST-1 पर वेब के परिणाम
- NASA Science — TRAPPIST-1 d सूची
- Nature — सात समशीतोष्ण स्थलीय ग्रह