TRAPPIST-1 c पर कैसा वायुमंडल हो सकता है?
TRAPPIST-1 c पृथ्वी से थोड़ा बड़ा और अधिक भारी है। इसे अपने तारे से लगभग उतनी ही ऊर्जा मिलती है, जितनी शुक्र को सूर्य से मिलती है। पहले इसे घने कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल और बादलों वाला “शुक्र का जुड़वाँ” माना जा सकता था। लेकिन 2023 में इसके दिन वाले भाग की गर्मी और 2026 में दिन से रात तक चमक में हुए बदलाव के माप, लगभग 1 बार से अधिक सतही दबाव वाले वायुमंडल से मेल नहीं खाते। 1 बार पृथ्वी की सतह के दबाव के करीब है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि यहाँ ऑक्सीजन का पतला वायुमंडल है या बिल्कुल वायुमंडल नहीं है और चमकीली सतह तारे की बहुत-सी रोशनी लौटा रही है।
- लगभग 2.4218 दिन तारे का एक चक्कर पूरा करने का समय
- लगभग 23.6 लाख किमी ग्रह और तारे के बीच औसत दूरी
- पृथ्वी का लगभग 1.31 गुना पारगमन के समय में बदलाव से निकाला गया द्रव्यमान
- पृथ्वी का लगभग 1.10 गुना ढकी हुई तारकीय रोशनी से निकाली गई त्रिज्या
जब ग्रह तारे के पीछे जाता है तो क्या माप सकते हैं?
जब ग्रह तारे के पास दिखाई देता है, तब दूरबीन को तारे की रोशनी और ग्रह के दिन वाले भाग की अवरक्त रोशनी दोनों मिलती हैं। ग्रह के तारे के पीछे छिप जाने पर केवल तारे की रोशनी बचती है। वेब के MIRI उपकरण ने ऐसे चार द्वितीयक ग्रहण देखे। 15 μm अवरक्त तरंगदैर्ध्य पर कुल चमक लगभग 0.04% घटी। इसी छोटे अंतर से ग्रह के दिन वाले भाग से निकलने वाली गर्मी का पता चला।
यह चमक लगभग 380 K, यानी 107°C के चमक तापमान के बराबर थी। शुक्र जैसा घना और कार्बन डाइऑक्साइड से भरपूर वायुमंडल 15 μm अवरक्त रोशनी सोखता और दिन की गर्मी को रात तक पहुँचाता। इससे दिन वाला भाग कम चमकीला दिखता। ग्रह c उससे कहीं अधिक चमकीला था। इसलिए यह घने कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल और सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों वाला शुक्र जैसा संसार नहीं है, लेकिन अकेले इस अवलोकन से यह नहीं कहा जा सका कि यहाँ कोई वायुमंडल है ही नहीं।
दिन और रात की गर्मी की तुलना कैसे करते हैं?
ग्रह के तारे के पीछे छिपने का क्षण केवल दिन वाले भाग की गर्मी बताता है। वेब ने ग्रह की एक पूरी कक्षा के दौरान, पृथ्वी की ओर दिखने वाला भाग बदलते समय, उसकी अवरक्त चमक लगातार दर्ज की। इसे तापीय कला-वक्र कहा जाता है। घना वायुमंडल हो तो गर्मी रात वाले भाग तक पहुँचती और वहाँ से भी अवरक्त रोशनी निकलती। सबसे गर्म जगह भी तारे की ओर सीधे देखने वाले बिंदु से कुछ हट सकती थी।
2026 के अवलोकनों में c के दिन वाले भाग का चमक तापमान 369±23 K, यानी लगभग 96±23°C था। रात वाले भाग की गर्मी साफ नहीं मिली और सबसे अधिक चमकने के समय में भी कोई स्पष्ट बदलाव नहीं दिखा। इससे दिन की गर्मी को बड़े पैमाने पर रात तक ले जाने वाले घने वायुमंडल की संभावना बहुत कम हो गई, खासकर लगभग 1 बार से अधिक सतही दबाव वाले वायुमंडल की।
ग्रह c पर शुक्र जैसा घना वायुमंडल नहीं है। लेकिन यहाँ पतला वायुमंडल है या तारे की बहुत-सी रोशनी लौटाने वाली चमकीली सतह, यह अभी मालूम नहीं है।
c का दिन वाला भाग अनुमान से ठंडा क्यों है?
ग्रह c, b की तुलना में तारे से अधिक दूर है और कम ऊर्जा पाता है। फिर भी केवल दूरी दोनों ग्रहों के कला-वक्रों का पूरा अंतर नहीं समझाती। c का दिन वाला भाग b से ठंडा है और वायुमंडल रहित सतह के मॉडल में उसकी परावर्तन क्षमता अधिक होनी चाहिए। चमकीली सतह आने वाली तारकीय रोशनी का बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष में वापस भेजती है और इसलिए ठंडी रहती है।
एक दूसरी संभावना मुख्यतः ऑक्सीजन से बना बेहद पतला वायुमंडल है। वह बहुत-सी गर्मी रोकने या उसे रात तक पहुँचाने के लिए कमजोर होगा, फिर भी दिन वाले भाग की अवरक्त चमक को बदल सकता है। मॉडल यह भी दिखाते हैं कि तेज तारकीय रोशनी ने कभी पानी को तोड़ा होगा, हल्का हाइड्रोजन अंतरिक्ष में निकल गया होगा और ऑक्सीजन पीछे बची होगी। यह गणना से निकली संभावना है, ऑक्सीजन की सीधी खोज नहीं।
- आकार और द्रव्यमान निकाले गए ढकी हुई तारकीय रोशनी से आकार और पड़ोसी ग्रहों के पारगमन समय में बदलाव से द्रव्यमान मिला।
- 2023 दिन वाले भाग की 15 μm अवरक्त रोशनी ने शुक्र जैसा घना कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल नकार दिया।
- पारगमन के समय तारकीय रोशनी जाँची गई हाइड्रोजन से भरपूर घना वायुमंडल नहीं मिला, लेकिन तारे के बदलाव माप में मिल गए।
- 2026 पूरी कक्षा में दिन और रात की गर्मी मापने पर 1 बार से अधिक दबाव वाले वायुमंडल की संभावना और कम हुई।
- आज पतले ऑक्सीजन वायुमंडल और बहुत अधिक रोशनी लौटाने वाली वायुमंडल रहित सतह में अंतर करने के लिए और अवलोकन चाहिए।
तारे की सतह के बदलाव वायुमंडल के अवलोकन को कैसे प्रभावित करते हैं?
जब ग्रह तारे के सामने से गुजरता है, तब उसके वायुमंडल से होकर आई तारकीय रोशनी का अध्ययन करके उन गैसों को खोजा जा सकता है जिन्होंने रोशनी सोखी। c के निकट-अवरक्त अवलोकनों ने हाइड्रोजन से भरपूर वायुमंडल और पानी, अमोनिया या कार्बन मोनोऑक्साइड से भरपूर कुछ घने वायुमंडल नकार दिए। लेकिन TRAPPIST-1 के धब्बे और चमकीले क्षेत्र भी तारे की रोशनी का रंग काफी बदलते हैं। इसलिए पतले वायुमंडल के छोटे निशान साफ नहीं मिल सके।
पूरी कक्षा में अवरक्त चमक का बदलाव तारकीय धब्बों से अलग तरह प्रभावित होता है, पर वह ऑक्सीजन जैसी कम गर्मी रोकने वाली गैस की सीधी पहचान नहीं करता। पतले वायुमंडल और चमकीली सतह में अंतर करने के लिए कई अवरक्त तरंगदैर्ध्यों और पारगमन के समय मिली तारकीय रोशनी, दोनों को एक ही उत्तर की ओर इशारा करना होगा।
TRAPPIST-1 c शुक्र से कितना मिलता-जुलता है?
c का द्रव्यमान और त्रिज्या एक चट्टानी संसार से मेल खाते हैं, लेकिन उनसे लोहे के केंद्र का आकार, सतह के खनिज या वायुमंडलीय दबाव अलग-अलग तय नहीं होते। शुक्र जितनी ऊर्जा मिलने का अर्थ यह भी नहीं कि आज दोनों का वातावरण समान है। उनके तारों के वर्णक्रम और ज्वालाएँ, उन्हें बनाने वाले पदार्थ और वायुमंडल खोने का इतिहास अलग हैं।
369±23 K, यानी लगभग 96±23°C, दिन वाले भाग का चमक तापमान है जिसे 15 μm अवरक्त रोशनी से निकाला गया है। यह न तो पूरे ग्रह का औसत तापमान है, न सतह की हर जगह का असली तापमान। पतला ऑक्सीजन वायुमंडल और बहुत अधिक रोशनी लौटाने वाली सतह, माप को समझाने वाले दो मॉडल हैं; ऑक्सीजन, बादल या खनिज सीधे नहीं खोजे गए हैं।
स्रोत
- NASA Exoplanet Archive — TRAPPIST-1 c
- NASA Science — घना कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल नकारा गया
- Nature — TRAPPIST-1 c पर घना कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल नहीं
- Nature Astronomy — TRAPPIST-1 b और c के तापीय कला-वक्र
- The Astrophysical Journal — TRAPPIST-1 c का पारगमन और तारकीय प्रभाव
- The Planetary Science Journal — TRAPPIST-1 के द्रव्यमान और त्रिज्याएँ
- NASA Science — TRAPPIST-1 प्रणाली के बारे में वेब की खोजें