हमें कैसे पता चलता है कि मंगल पर कभी नदियाँ और झीलें थीं?
आज मंगल ठंडा और सूखा रेगिस्तान है, लेकिन बहुत पहले उसके कई क्षेत्रों में नदियाँ और झीलें थीं। पानी से कटी घाटियाँ, नदियों के जमा किए पदार्थों से बने डेल्टा और पानी से प्रतिक्रिया करके बने खनिज एक ही अतीत की ओर इशारा करते हैं। वैज्ञानिक इन सभी प्रमाणों को साथ पढ़कर मंगल के लुप्त हुए पानी का इतिहास समझते हैं।
इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरा मंगल लंबे समय तक किसी गर्म महासागर से ढका था। पानी कब और कितनी देर बहा, यह अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है। वैज्ञानिक यह संभावना भी जाँच रहे हैं कि ठंडे वातावरण में बर्फ बार-बार पिघली हो। इतना निश्चित है कि मंगल की सतह शुरू से आज जैसी सूखी नहीं थी।
- लगभग 3,390 किमी मंगल की त्रिज्या, जो पृथ्वी की लगभग आधी है
- 24 घंटे 37 मिनट मंगल के एक दिन की अवधि, जो पृथ्वी के एक दिन के करीब है
- 687 दिन सूर्य की एक परिक्रमा में मंगल को लगने वाले पृथ्वी के दिन
- दो चंद्रमा छोटे और बेढंगे आकार वाले फोबोस और डाइमोस
मंगल का लाल रंग कहाँ से आया?
मंगल की चट्टानों और मिट्टी में लोहे वाले बहुत से खनिज हैं। ये खनिज उसी तरह ऑक्सीकृत हुए जैसे पृथ्वी पर लोहे में जंग लगती है। फिर वे महीन धूल में टूटकर सतह के बड़े हिस्से पर फैल गए। हवा इस धूल को वायुमंडल में उठा देती है, इसलिए दूर से पूरा ग्रह लाल दिखाई देता है।
पास से देखने पर सतह केवल एक ही लाल रंग की नहीं है। वहाँ भूरी और सुनहरी मिट्टी, काली चट्टानें और हल्के रंग के खनिज भी हैं। “लाल ग्रह” का अर्थ यह नहीं कि हर जमीन का रंग एक जैसा है। इसका अर्थ है कि ऑक्सीकृत लोहे की धूल दूर से दिखने वाला प्रमुख रंग बनाती है।
जेज़ेरो का सूखा डेल्टा हमें क्या बताता है?
पर्सिवियरेंस रोवर जिस जेज़ेरो क्रेटर की खोज कर रहा है, उसमें पंखे की तरह फैला एक डेल्टा बचा हुआ है। 3.5 अरब वर्ष से भी पहले एक नदी क्रेटर की दीवार के रास्ते भीतर आई, उसने झील बनाई और रेत व कीचड़ जमा किए। कक्षा से हुए अवलोकनों ने डेल्टा के निक्षेपों में पानी से बदले हुए चिकनी मिट्टी और कार्बोनेट के खनिज भी पहचाने हैं।
नदी जब झील में प्रवेश करके धीमी होती है, तो अपने साथ लाए पदार्थ नीचे छोड़ती है और डेल्टा बनता है। पर्सिवियरेंस ने जिन परतों की तस्वीरें लीं, उनमें अपेक्षाकृत शांत झील के साथ बाद में आई इतनी तेज बाढ़ के निशान भी हैं जो बड़े पत्थर तक बहा लाई। जेज़ेरो के पानी का इतिहास केवल एक बार झील भरने और फिर शांति से सूख जाने की सरल कहानी नहीं था।
- नदी ने रास्ता बनाया बहता पानी क्रेटर की दीवार में बने मार्ग से गुजरा और रेत व कीचड़ लाया।
- झील और डेल्टा बने पानी धीमा हुआ तो उसके साथ आए पदार्थ परतों में जम गए।
- तेज बाढ़ आई बाद की प्रबल धाराएँ बड़े पत्थरों को भी डेल्टा की ओर ले गईं।
- झील सूख गई जलवायु बदलने के बाद पानी गायब हो गया, लेकिन भू-आकृतियाँ और चट्टानी परतें बची रहीं।
- रोवर अभिलेख पढ़ता है पर्सिवियरेंस कैमरों और उपकरणों से चट्टानों की जाँच करता है और कुछ नमूने सील कर चुका है।
जब नदी जैसी घाटियाँ, पंखे के आकार का डेल्टा और पानी से बदले खनिज एक ही स्थान पर जुड़े मिलते हैं, तब प्राचीन झील का इतिहास सामने आता है।
पानी और घना वायुमंडल कहाँ गए?
आज मंगल का वायुमंडल पृथ्वी से बहुत पतला है, इसलिए तरल पानी सतह पर लंबे समय तक नहीं टिक सकता। फिर भी पानी पूरी तरह गायब नहीं हुआ। ध्रुवों और सतह के पास जमीन के नीचे बर्फ है, और कुछ पानी चट्टान बनाने वाले खनिजों के भीतर बंद है।
2021 में प्रकाशित मंगल के जल-चक्र के एक मॉडल ने बताया कि शुरुआती पानी का लगभग 30–99% हिस्सा पर्पटी के खनिजों में फँसा हो सकता है। इतना बड़ा अंतर बताता है कि सही मात्रा अभी निश्चित नहीं है। मंगल का कुछ पानी अंतरिक्ष में निकल गया, लेकिन पूरा पानी एक ही रास्ते से गायब नहीं हुआ।
वायुमंडल का बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष में निकल गया। MAVEN कक्षीय यान ने 2014 से 2025 तक देखा कि सूर्य की पराबैंगनी किरणें और सौर पवन मंगल के ऊपरी वायुमंडल से कणों को कैसे अलग करती हैं। आर्गन परमाणुओं के अनुपात पर आधारित विश्लेषण ने अनुमान लगाया कि मंगल के वायुमंडल में मौजूद आर्गन का लगभग 65% हिस्सा अंतरिक्ष में खो गया। इससे पता चलता है कि लंबे समय में वायुमंडल को पतला करने में सूर्य की बड़ी भूमिका रही।
क्या “संभावित जैव-संकेत” का अर्थ जीवन मिलना है?
नहीं। पर्सिवियरेंस ने 2024 में “Cheyava Falls” नाम की चट्टान से जो नमूना लिया, उसमें कार्बनिक कार्बन वाला मडस्टोन और लोहे व सल्फर के खनिजों से बने छोटे धब्बे हैं। 2025 में Nature में प्रकाशित शोधपत्र ने इस मेल को संभावित जैव-संकेत कहा, क्योंकि यह जीवों की गतिविधि से मेल खा सकता है।
संभावित जैव-संकेत का अर्थ यह नहीं है कि जीवन की पुष्टि हो गई है। इसका अर्थ है कि वैज्ञानिकों को दोनों संभावनाएँ जाँचनी होंगी—यह निशान जीवों ने बनाया हो सकता है, या जीवन के बिना हुई रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बना हो सकता है। केवल कार्बनिक पदार्थ मिलना भी जीवन का प्रमाण नहीं है।
शोधकर्ताओं ने ऐसी कई प्रतिक्रियाएँ भी जाँचीं जिनमें जीवों की जरूरत नहीं होती, लेकिन रोवर के मौजूदा उपकरण यह तय नहीं कर सके कि कौन-सी व्याख्या सही है। पर्सिवियरेंस ने इस चट्टान का नमूना सील करके रखा है। खनिज, कार्बनिक पदार्थ और धब्बे कैसे बने, यह जानने के लिए अधिक संवेदनशील उपकरणों से विश्लेषण और आगे के अध्ययन जरूरी होंगे।
लाल रेगिस्तान में कई तरह के प्रमाण सुरक्षित हैं
मंगल की लाल धूल आज के सूखे वातावरण को दिखाती है, जबकि उसके नीचे की घाटियाँ, डेल्टा और खनिज पानी वाले अतीत का रिकॉर्ड रखते हैं। जेज़ेरो में शांत झील और तेज बाढ़ ने अलग-अलग चट्टानी परतें छोड़ीं। वायुमंडल और पानी भी किसी एक ही प्रक्रिया से गायब नहीं हुए।
इसीलिए मंगल का इतिहास किसी एक तस्वीर या किसी खास खनिज से तय नहीं किया जा सकता। जब भू-आकृतियों का आकार, चट्टानी परतों का क्रम, खनिजों की संरचना और वायुमंडल में परमाणुओं के अनुपात एक-दूसरे से मेल खाते हैं, तब ग्रह के बदलाव अधिक स्पष्ट होते हैं। मंगल एक सूखा रेगिस्तान है और साथ ही प्राचीन पर्यावरणीय बदलावों का अभिलेख सँभालकर रखने वाला ग्रह भी है।
स्रोत
- NASA Science — Mars Facts
- NASA Science — Mars 2020: Perseverance Rover
- NASA Science — Perseverance Science Highlights
- NASA JPL — New Study Challenges Long-Held Theory of Mars’ Water
- NASA Science — MAVEN
- NASA — Perseverance Potential Biosignature
- Nature — Redox-Driven Mineral and Organic Associations in Jezero Crater
