क्या केपलर-90 d, e और f अनुनाद में हैं?
Kepler-90 d, e और f की कक्षीय अवधियाँ क्रमशः लगभग 59.74, 91.94 और 124.91 दिन हैं। सबसे भीतरी ग्रह d की अवधि को 2 मानें, तो अनुपात लगभग 2:3.078:4.182 बनता है—2:3:4 के करीब। फिर भी केवल अवधि का अनुपात अनुनाद सिद्ध नहीं करता। 2024 के अध्ययन में तीनों ग्रहों की स्थिति बताने वाला कोण किसी सीमित दायरे में नहीं रहा और उन्हें एक ही अनुनाद से जोड़ने का प्रमाण भी नहीं मिला।
- लगभग 91.94 दिन बार-बार हुए पारगमन से मापी गई e की कक्षीय अवधि
- 2 : 3.078 : 4.182 d की अवधि को 2 मानने पर d·e·f का वास्तविक अनुपात
- पृथ्वी की लगभग 2.66 गुनी त्रिज्या पारगमन की गहराई और तारे के आकार से निकली e की त्रिज्या
- पृथ्वी से लगभग 10 गुना e तक पहुँचने वाली तारकीय ऊर्जा
उनकी परिक्रमा अवधियाँ 2:3:4 के अनुपात से कितनी अलग हैं?
यदि अवधियों का अनुपात ठीक 2:3:4 हो, तो d के छह चक्कर लगाने तक e चार और f तीन चक्कर लगाएगा। वास्तव में d और e का अवधि अनुपात लगभग 1.539 है, जो ठीक 1.5 से बड़ा है। e और f का अनुपात भी लगभग 1.359 है, जो ठीक 1.333 से बड़ा है। इस छोटे अंतर के कारण तीनों ग्रह हर बार ठीक उसी स्थिति में वापस नहीं आते।
मौजूदा कक्षीय अवधियों से इस स्थिति-चक्र के दोहरने का समय लगभग 23 साल निकलता है। यह Kepler की लगभग चार साल की अवलोकन अवधि से बहुत लंबा है। इसलिए अवधियाँ सटीक होने पर भी उपलब्ध आँकड़ों से सीधे यह तय करना कठिन है कि ग्रहों का आपसी स्थान सीमित दायरे में दोहरता है या लगातार बदलता रहता है।
2:3:4 के करीब कक्षीय अवधियाँ अनुनाद की संभावना का संकेत देती हैं। पुष्टि के लिए यह भी देखना होता है कि तीनों ग्रहों का आपसी स्थान सीमित दायरे में दोहरता है या नहीं।
तीनों ग्रहों के अनुनाद की पुष्टि कैसे की जा सकती है?
खगोलविद d·e·f की स्थितियों को तय अनुपात में जोड़कर एक कोण बनाते हैं, जिसे लैप्लास कोण कहते हैं। यदि तीनों ग्रह गुरुत्वाकर्षण से जुड़े अनुनाद में हों, तो यह कोण पूरे 360 डिग्री नहीं घूमता बल्कि सीमित दायरे में आगे-पीछे होता है। यदि कोण लगातार 0 से 360 डिग्री तक बदलता रहे, तो करीबी अवधियों के बावजूद इसे पूर्ण लैप्लास अनुनाद नहीं माना जाता।
2014 के खोज अध्ययन ने d·e·f की अवधियों से तीन-ग्रह अनुनाद की संभावना सुझाई थी। बाद के शोध में अलग-अलग द्रव्यमान, कक्षीय आकार और शुरुआती स्थितियाँ रखकर लैप्लास कोण का समय के साथ बदलाव निकाला गया। 2024 के अध्ययन में कोण सीमित दायरे में नहीं रहा और d तथा f के बीच 2:1 अनुनाद भी नहीं मिला। फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि तीनों की अवधियाँ 2:3:4 के करीब हैं।
- अवधि मापन बार-बार हुए पारगमन से 59.74, 91.94 और 124.91 दिन की अवधियाँ मिलती हैं।
- पूर्णांक अनुपात देखा जाता है कि 2:3.078:4.182, 2:3:4 के कितना करीब है।
- स्थिति की गणना द्रव्यमान, कक्षीय आकार और शुरुआती स्थिति से लैप्लास कोण का बदलाव निकाला जाता है।
- निष्कर्ष कोण सीमित दायरे में रहता है या 360 डिग्री घूमता है, इससे अनुनाद की जाँच होती है।
मिलते-जुलते अवधि अनुपात ग्रहों के निर्माण के बारे में क्या बताते हैं?
तारे के आसपास गैस और धूल के बीच खिसकते हुए ग्रह सरल अवधि अनुपातों के पास जमा हो सकते हैं। गैस और धूल हटने या ग्रहों के बीच ऊर्जा के आदान-प्रदान के बाद अनुपात अनुनाद से थोड़ा दूर हो सकता है। यह भी संभव है कि समान अनुपात संयोग से बना हो। केवल आज की अवधियों से यह तय नहीं किया जा सकता कि इनमें से कौन-सी प्रक्रिया हुई थी।
e, d और f के बीच है, इसलिए दोनों पड़ोसी ग्रहों की गुरुत्वाकर्षण का असर उस पर पड़ता है। इस असर की सही गणना के लिए तीनों के वास्तविक द्रव्यमान और कक्षीय आकार जानने होंगे। सूची में दिए d·e·f के द्रव्यमान समान आकार के अन्य ग्रहों के आँकड़ों से निकले अनुमान हैं, प्रत्यक्ष माप नहीं।
क्या परिक्रमा अवधि से केपलर-90 e के वातावरण का पता चलता है?
e की त्रिज्या पृथ्वी की लगभग 2.66 गुनी है। सूची में दिया लगभग 7.56 पृथ्वी-द्रव्यमान प्रत्यक्ष माप नहीं, बल्कि समान आकार के दूसरे ग्रहों के आँकड़ों से निकला अनुमान है। इन दो संख्याओं से यह नहीं पता चलता कि ग्रह में चट्टानी केंद्र, पानी जैसे वाष्पशील पदार्थ या हाइड्रोजन-हीलियम वायुमंडल कितना है। एक ही आकार के ग्रहों की भीतरी बनावट अलग हो तो उनकी वास्तविक द्रव्यमान भी अलग हो सकते हैं।
e अपने तारे से लगभग 0.42 AU, यानी करीब 6.28 करोड़ किमी दूर है और पृथ्वी को सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा की लगभग 10 गुनी ऊर्जा पाता है। तारकीय प्रकाश के परावर्तन और ऊष्मा-वितरण की सरल धारणाओं से तापमान लगभग 450 K, यानी करीब 177 डिग्री सेल्सियस निकलता है। यह वायुमंडल या सतह पर मापा गया वास्तविक तापमान नहीं है। ऋतुएँ समझने के लिए घूर्णन अक्ष का झुकाव, कक्षा का आकार और वायुमंडल में ऊष्मा का वितरण जानना होगा; e के लिए ये अभी मापे नहीं गए हैं।
पृष्ठ पर दिखाया ग्रह अवलोकन से ली गई तस्वीर नहीं, बल्कि समझाने के लिए बनाया गया चित्र है। e की अवधि और त्रिज्या पारगमन अवलोकन पर आधारित हैं। उसका द्रव्यमान दूसरे ग्रहों के आँकड़ों से और लगभग 177 डिग्री सेल्सियस का तापमान सरल ऊष्मा-गणना से निकला है। d·e·f के पूर्ण तीन-ग्रह अनुनाद की पुष्टि नहीं हुई है।
अनुनाद का पता लगाने के लिए और किन अवलोकनों की जरूरत है?
अनुनाद की अधिक सटीक जाँच के लिए Kepler के कई साल बाद हुए नए पारगमन देखने होंगे और उनके वास्तविक समय की तुलना अनुमानित समय से करनी होगी। तीनों ग्रहों की आपसी खींचतान से पारगमन समय में आए बदलावों का संयुक्त विश्लेषण किया जा सकता है। उनके गुरुत्वाकर्षण से तारे की गति मापकर वास्तविक द्रव्यमान के करीब मान भी पाया जा सकता है। फिर इन्हीं द्रव्यमानों और कक्षीय आँकड़ों से लैप्लास कोण दोबारा निकालकर जाँचा जा सकेगा कि e, d और f को एक अनुनाद में जोड़ता है या नहीं।
स्रोत
- NASA Exoplanet Archive — Kepler-90 e Parameters and Mass Provenance
- Astronomy & Astrophysics — The Planetary System to KIC 11442793
- Monthly Notices of the Royal Astronomical Society — Analysing the Dynamics of the Kepler-90 Planetary System
- The Astronomical Journal — Dynamics of Tightly Packed Planetary Systems
- The Astrophysical Journal — Probabilistic Mass–Radius Relation
- NASA Science — Kepler Transit Method
- NASA Exoplanet Archive — Kepler Data Products Overview