ब्रह्मांड में अब तक एक भी काला बौना तारा क्यों नहीं है?
काला बौना तारा एक सैद्धांतिक अवधारणा है: भविष्य का वह तारकीय अवशेष, जो किसी श्वेत बौने के लगभग अकल्पनीय समय तक ऊष्मा खोने और बहुत कम प्रकाश उत्सर्जित करने के बाद बनेगा। ब्रह्मांड की आयु लगभग 13.8 अरब वर्ष है, लेकिन माना जाता है कि किसी श्वेत बौने को पर्याप्त ठंडा होने में इससे कहीं अधिक समय लगेगा। इसलिए अभी तक कोई काला बौना नहीं देखा गया है, और यह नाम किसी वास्तविक वर्णक्रमीय वर्ग के बजाय दूर भविष्य की अवस्था बताता है।
- आरंभिक अवस्था नाभिकीय संलयन बंद कर चुका, संचित ऊष्मा से चमकता श्वेत बौना
- प्रक्रिया वह अपने आसपास ऊष्मा विकीर्ण करते हुए धीरे-धीरे ठंडा और मंद होता जाता है।
- प्रेक्षण स्थिति ब्रह्मांड अभी इतना पुराना नहीं है कि कोई काला बौना बन चुका हो।
- अनिश्चितता अंतिम तापमान और समयमान दूर भविष्य के ब्रह्मांडीय वातावरण तथा भौतिक मॉडल पर निर्भर हैं।
श्वेत बौना इतनी धीमी गति से ठंडा क्यों होता है?
श्वेत बौना अत्यधिक सघन पिंड है, जिसमें पृथ्वी के लगभग बराबर आकार में बहुत अधिक द्रव्यमान समाया होता है। वह नया संलयन ऊर्जा स्रोत नहीं बनाता, पर अपने भीतर संचित ऊष्मा को बहुत लंबे समय तक छोड़ता रहता है। ठंडा होते समय अंदर का क्रिस्टलीकरण और तत्वों का पृथक्करण ऊर्जा निकलने की गति को प्रभावित करते हैं। जैसे-जैसे वह मंद होता है, ब्रह्मांडीय पृष्ठभूमि से उसका तापांतर भी घटता है और ऊष्मा खोने की प्रक्रिया और लंबी हो जाती है। यह किसी बल्ब के बुझने तक वर्ष गिनने जैसा सरल प्रश्न नहीं है।
काला बौना किसी खोजे गए काले तारे का नाम नहीं है; यह श्वेत बौने के शीतलन को ब्रह्मांड के दूर भविष्य तक बढ़ाने वाले विचार-प्रयोग जैसा है।
क्या “पूरी तरह ठंडा” होने का अर्थ परम शून्य है?
लोकप्रिय व्याख्याएँ अक्सर काले बौने को ऐसा श्वेत बौना कहती हैं जिसने अपनी सारी ऊष्मा विकीर्ण कर दी हो। इसका अर्थ यह नहीं लगाना चाहिए कि वह सीमित समय में ठीक परम शून्य तक पहुँच जाता है। यह उस अवस्था के अधिक निकट है जिसमें वह ब्रह्मांडीय पृष्ठभूमि विकिरण से ऊर्जा का आदान-प्रदान करता है और तापांतर धीरे-धीरे बहुत छोटा हो जाता है। दूर भविष्य में ब्रह्मांड का विस्तार, कणों की स्थिरता और अभी अधूरी भौतिकी भी गणना को प्रभावित करेगी। इसलिए एक सटीक निर्माण-वर्ष बताने के बजाय यह कहना वैज्ञानिक रूप से अधिक सुरक्षित है कि समयमान वर्तमान ब्रह्मांडीय आयु से बहुत अधिक है।
तारे के जीवन में यह कहाँ आता है?
- मुख्य अनुक्रम सूर्य जैसा तारा अपने केंद्र में हाइड्रोजन का संलयन करता है।
- दानव अवस्था और बाहरी परतों का निष्कासन कम या मध्यम द्रव्यमान वाला तारा जीवन के अंत में बाहरी परतें खो देता है।
- श्वेत बौना गर्म केंद्रीय अवशेष संलयन के बिना बहुत लंबे समय तक ठंडा होता है।
- काला बौना मॉडल अत्यंत दूर भविष्य में लगभग प्रकाशहीन अवस्था का अनुमान लगाते हैं।
इस क्रम की पहली तीन अवस्थाएँ अनेक पिंडों में देखी जा चुकी हैं। केवल अंतिम अवस्था अभी सिद्धांत के क्षेत्र में है। काले और श्वेत बौनों को आज मौजूद तारों की दो समान किस्मों की तरह दिखाने से उनकी प्रेक्षण स्थिति का महत्वपूर्ण अंतर मिट जाएगा।
भविष्य के काले बौनों का अध्ययन कैसे किया जा सकता है?
खगोलविद अलग-अलग प्रेक्षित तापमान वाले श्वेत बौनों की तुलना करके शीतलन मॉडलों की जाँच करते हैं। गाइया द्वारा मापी गई श्वेत बौना आबादी की चमक और रंग-वितरण ने संकेत दिया कि क्रिस्टलीकरण शीतलन को धीमा करता है। इसी परखी हुई भौतिकी को बहुत लंबे समयमान तक बढ़ाकर काले बौने की अवधारणा का अध्ययन किया जाता है। फिर भी, श्वेत बौने के पदार्थ में दीर्घकालिक बदलाव और प्रोटॉन क्षय जैसी परिकल्पनाएँ अभी निश्चित नहीं हैं। दूर भविष्य के असामान्य विस्फोटों पर भी शोध हुआ है, पर उन्हें काले बौने की मूल परिभाषा या प्रेक्षण तथ्य नहीं समझना चाहिए।
काले बौनों का ब्लैक होल से कोई संबंध नहीं है। वे घटना क्षितिज वाले गुरुत्वीय पिंड नहीं, बल्कि ठंडे हो चुके श्वेत बौनों के काल्पनिक वंशज हैं।
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